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पानी के लिए तरस रहा है महाराष्ट्र का ये गांव, पिछले 17 दिनों से किसी भी घर में पानी का एक बूंद तक नहीं आया

महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। बुलढाणा जिले के चोरपांग्रा गांव में पिछले 17 दिनों से घरों के नलों में पानी नहीं आया है। बच्चे स्कूल नहीं जा रहे, किसान परेशान है, मजदूर काम पर नहीं जा रहे। सब के सब अपने-अपने घरों के लिए पानी जुटाने में लगे है।

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Buldhana District

महाराष्ट्र में पिछले कुछ महीनों में अच्छी बारिश हुई थी, जिसकी वजह से प्रशासन ने राज्य में पानी की समस्या खत्म होने का दावा किया था। लेकिन बुलढाणा जिले में एक ऐसा गांव है जहां पिछले 17 दिनों से घरों के नलों में पानी नहीं आया है। लोगों को गांव से बाहर जाकर कुएं से पानी लाना पड़ रहा है। पानी जुटाने के कारण किसान अपने खेतों में काम नहीं कर पा रहे है। यह गांव बुलढाणा जिले के सिंदखेडराजा तालुका में है। गांव का नाम चोरपांग्रा है। महाराष्ट्र के कई हिस्सों के किसान मूसलाधार बरसात और बाढ़ की वजह से परेशान हैं तो यहां बिन पानी त्राहिमाम है।

पानी की दिक्कत होने के चलते ग्रामीण अपना गुस्सा ग्राम पंचायत प्रशासन पर उतार रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अगर ग्राम पंचायत ने पानी का तत्काल बंदोबस्त नहीं करवाया तो वे ग्राम पंचायत के खिलाफ हंडी मोर्चा निकालेंगे। गांव में पीने का पानी जुटाने के लिए खासकर महिलाओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। महिलाएं इसके लिए गांव के पदाधिकारियों को जिम्मेदार ठहरा रही हैं। यह भी पढ़ें: Mumbai News: पुलिस ने GST रैकेट का किया भांडाफोड़, 132 करोड़ के फेक बिल के साथ गैंग का मास्टरमाइंड गिरफ्तार

बता दें कि ग्रामीणों का आरोप है कि इससे पहले इस चोरपांग्रा गांव के लिए प्रशासन से करीब 23 लाख रुपए खर्च कर पानी की आपूर्ति के लिए योजना लाई गई। इस योजना के तहत पाइपलाइन, कुएं, नल, पानी की टंकी सहित सभी सुविधाओं को शुरू किया जाना था। लेकिन ग्राम पंचायत ने ऐसा नहीं किया। ग्राम पंचायत की लापरवाही के चलते गांव में पानी का अभाव बनावटी रूप से तैयार करवाया गया। ग्राम पंचायत ने ऐसी खराब व्यवस्था करके रखी है कि कुएं में पानी होते हुए भी 15 से 20 दिनों तक ग्रामीणों को पानी नहीं मिल पा रहा है।

पानी ना मिल पाने से ग्रामीणों को गांव से बाहर जाकर कुएं से पानी भर कर लाना पड़ रहा है। पानी की किल्लत होने की वजह से किसान खेत नहीं जा पा रहे, खेत मजदूर काम पर नहीं जा पा रहे। वहीं, बच्चे भी स्कूल नहीं जा पा रहे है। ये सब बस घर के लिए पीने का पानी जुटाने में लगे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, सरकारी फंड गांव के लिए आते हैं लेकिन सही नियोजन और नाकाबिल लोगों से भरी ग्राम पंचायत के कारण उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। गांव वालों की मांग है कि राज्य सरकार सीधे इस गांव की पानी की समस्या सुलझाने के लिए कोई बड़ा कदम उठाए और पानी की समस्या से उनके गांव को निजात दिलाए।