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जावीद अहमद 13 IPS अधिकारियों को सुपरसीड कर बने थे यूपी के DGP, अब बता रहे हैं ‘M’ होना गुनाह

उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी जावीद अहमद ने अपने एक व्हाट्सऐप मैसेज में कहा कि ‘अल्लाह की मर्जी, बुरा तो लगता है पर ‘M’ होना गुनाह है।

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जावीद अहमद 13 IPS अधिकारियों को सुपरसीड कर बने थे यूपी के DGP, अब बता रहे हैं ‘M’ होना गुनाह

जावीद अहमद 13 IPS अधिकारियों को सुपरसीड कर बने थे यूपी के DGP, अब बता रहे हैं ‘M’ होना गुनाह

नई दिल्ली। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को लेकर छिड़े घमासान के बीच बीते शनिवार, 2 फरवरी को नए निदेशक के तौर पर मध्यप्रदेश के पूर्व डीजीपी ऋषि कुमार शुक्ला की नियुक्ति हो गई। लेकिन अब इसपर भी सियासत शुरु हो गई है। दरअसल उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी जावीद अहमद ने अपने एक व्हाट्सऐप मैसेज में कहा कि ‘अल्लाह की मर्जी, बुरा तो लगता है पर ‘M’ होना गुनाह है। बता दें कि जावीद अहमद ने यह मैसेज एक व्हाट्स ग्रुप में तब लिखा था जब किसी ने नए सीबीआई निदेशक की नियुक्ति का लेटर लखनऊ से चल रहे इस ग्रुप में डाल दिया। जावीद के ‘M’ का मतलब हर कोई उनके मुसलमान होने से लगा रहा है।

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सीबीआई डायरेक्टर की दौड़ मे शामिल थे जावीद अहमद

आपको बता दें कि जावीद अहमद भी सीबीआई के नए निदेशक बनने की दौड़ में शामिल थे। लेकन शनिवार की शाम को आईपीएस ऋषि कुमार शुक्ला के नाम का ऐलान किया गया। ऋषि कुमार शुक्ला मध्यप्रदेश कैडर के 1983 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं, जबकि जावीद अहमद उत्तर प्रदेश कैडर के 1985 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। इस लिहाज से शुक्ला दो वर्ष सीनियर हुए। पीएम मोदी, चीफ जस्टिस रंजन गोगोई और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की समिति ने 2-1 की बहुमत से ऋषि कुमार शुक्ला को सीबीआई के नए निदेशक के तौर पर मंजूरी दी। मल्लिकार्जुन खड़गे ने हालांकि जावीद अहमद के नाम की सिफारिश की थी।

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जावीद अहमद13 IPS अधिकारियों को सुपरसीड कर बने थे DGP

आपको बता दें कि सीबीआई के नए निदेशक नहीं बन पाने के बाद जावीद अहमद मुस्लिम कार्ड खेल रहे हैं। यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्हें केवल इसलिए सीबीआई का निदेशक नहीं बनाया गया क्योंकि वे मुसलमान हैं। लेकिन उनकी यह बात और सोंच सही नहीं हैं। क्योंकि जावीद अहमद जब उत्तर प्रदेश के डीजीपी बने उस वक्त उन्होंने 13 आईपीएस अधिकारियों को सुपरसीड किया था। यानी कि 13 होनहार आईपीएस अधिकारियों को पीछे छोड़ते हुए उत्तर प्रदेश के डीजीपी बने थे। उस वक्त यह सवाल नहीं उठाया गया कि मुसलमान होने की वजह से उन्हें डीजीपी बनाया जा रहा है या फिर उनके अनुभव और कार्यक्षमता को देखकर। हालांकि अब जब वे सीबीआई के निदेशक नहीं बनाए गए हैं तो ऐसे में धार्मिक और जातिगत कार्ड खेल कर खुद को पीड़ित बताना तर्कसंगत नहीं है। बता दें कि जब जावीद अहमद उत्तर प्रदेश के डीजीपी बनाए गए थे उस वक्त उनसे वरिष्ठ अधिकारी रंजन द्विवेदी, आरआर भटनागर, वीके गुप्ता, रजनीकांत मिश्रा के नाम भी दौड़ में शामिल थे। लेकिन इनसबको सुपरसीड कर वे डीजीपी बने थे। जावीद के इस बयान के बाद अब सवाल उठता है कि क्या केंद्र सरकार Al India Service Conduct Rule 1968 के तहत कार्रवाई करेगी? क्योंकि इस तरह के बयान नियमों का उल्लंघन है।

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मल्लिकार्जुन खड़गे ने जताई थी आपत्ति

आपको बता दें कि ऋषि कुमार शुक्ला की नियुक्ति को लेकर कांग्रेस पार्टी की ओर से मल्लिकार्जुन खड़गे ने आपत्ति दर्ज कराई थी। इस बाबत पीएम मोदी को पत्र भी लिखा था। अपने पत्र में काग्रेस ने दावा किया है कि ऋषि कुमार शुक्ला को एंटी करप्शन जांच का अनुभव नहीं है। उन्होंने आगे लिखा है कि कांग्रेस की ओर से इस पद पर जावेद अहमद के नाम का प्रस्ताव रखा था। लेकिन सरकार ने आखिरकार ऋषि कुमार शुक्ला को सीबीआई का नया निदेशक बना दिया है। बता दें कि ऋषि कुमार शुक्ला की यह नियुक्ति कैबिनेट की सिफारिश पर की गई है। दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम 1946 की धारा 4 ए (1) के अनुसार गठित समिति द्वारा अनुशंसित पैनल के आधार पर, मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने ऋषि कुमार शुक्ला को नियुक्ति को मंजूरी दी। सरकारी आदेश में कहा गया है कि निदेशक-केंद्रीय जांच ब्यूरो कार्यालय के प्रभार ग्रहण करने की तारीख से दो साल की अवधि के लिए है।

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