
मेरठ। माल रोड पर व्हीलर्स क्लब के ठीक बराबर के बंगले से लोग दिन में गुजरते हुए डरते हैं, तो शाम होते ही यहां के सन्नाटे से लोग इधर आने से परहेज करते हैं। व्हीलर्स क्लब में एक आेर पार्टियों का दौर चलता है। तो, वहीं दूसरी ओर सुनसान इस जर्जर बंगले में तरह-तरह की आवाजें आती हैं। माल रोड से करीब 100 मीटर अंदर इस बंगले का मुख्य गेट हैं। इस बंगले का खौफ इतना है कि दिन में स्कूली बच्चे इधर से नहीं गुजरते। काफी पहले लोगों ने रात के समय लाल पोशाक वाली युवती को गेट से अंदर जाते आैर कभी जर्जर बंगले की छत पर बैठे देखा। इसके अलावा बंगले के हाॅल में चार लोगों को एक टेबल के चारों आेर शराब पीते देखा था। यह बंगला इतना जर्जर हो गया कि दीवारों से पेड़-पौधे निकल रहे हैं। लंबी-लंबी झाड़ियां, बंगले के अंदर जाले आैर गंदगी है। इस बंगले को देश के '10 इंडियाज मोस्ट हाॅन्टेड प्लेस' में शामिल किया गया है। यह 'जीपी ब्लाॅक का भूत बंगला' के नाम से जाना जाने लगा।
इस बंगले का इतिहास
माल रोड का यह बंगला दस्तावेजों में जवाहर लाल मथुरा प्रसाद के नाम से है। यहां आेल्ड ग्रांट बंगला 111 ए, बी, सी व डी चार भागों में है। ब्रिटिश राज में 1890 में इस बंगले में ब्रिगेड कमांड आॅफिस का काम होता रहा। देश को आजादी मिलने के बाद सब-एरिया हेडक्वार्टर कंकरखेड़ा रोड पर स्थापित हुआ। इस बंगले को तब स्टोर की तरह उपयोग में लाया गया। बाद में आर्मी अफसरों का अावास भी बना यह बंगला। 60 दशक तक एेसा ही रहा, लेकिन इसका रखरखाव ठीक तरह से नहीं होने के कारण आर्मी अफसर यहां रहने से मना करने लगे। उसके बाद यह बंगला खंडहर बनता गया आैर लोग इसे भूत बंगला कहने लगे। हालांकि तब भी यहां दो परिवार इसकी देखभाल के लिए कैंपस में ही रहते थे।
लाल पोशाक वाली वह युवती
यहां रहने वाले परिवार और आसपास के लोग इस बंगले को लेकर लोग कहते हैं कि बंगले के मुख्य गेट के आसपास व छत पर लाल रंग के कपड़े पहने एक युवती अक्सर देखी जाती है। साथ ही यहां बंगले के मेन हाॅल में टेबल पर चार युवकों को शराब पीते देखा जाता है। साथ ही वहां से तरह-तरह की आवाजें आती हैं। लोग कहते हैं कि यह बाते अब तो पूरे शहर में फैल गर्इ आैर लोगों ने इधर से गुजरना भी बंद कर दिया। यहां जो परिवार रहते थे, उन लोगों ने भी डर की वजह से यहां रहना बंद कर दिया। वह लाल कपड़ों में युवती कौन थी, यह रहस्य आज भी बना हुआ है। इस बंगले में आज भी सन्नाटा है, अब यहां कोर्इ नहीं रहता। कैंट क्षेत्र में कर्इ स्कूल हैं, इनके छात्र दिन में इधर से नहीं गुजरते आैर शाम होने के बाद इस जर्जर बंगले में अंधेरा होने के कारण लोग गुजरते हुए डरते हैं। जबकि कैंट बोर्ड के प्रवक्ता एमए जफर का कहना है कि काफी समय से देखभाल नहीं होने के कारण यह बंगला वीरान पड़ा हुआ है। बंगले को लेकर कर्इ चर्चाएं सुनी हैं, लेकिन हकीकत पता नहीं चल पायी है।
मनोचिकित्सक क्या मानते हैं इसे
मनोचिकित्सक डॉ. सोना कौशल भारती का कहना है कि भूत-प्रेत की बातें अज्ञानता के कारण बच्चों आैर बड़ों के मन में बैठ जाती हैं। पढ़े-लिखे लोगों में इनके प्रति धारणा कम लोगों में देखी गर्इ है। अकसर देखा गया है कि बच्चों के मन में शुरू से ही भूत-प्रेत का डर बैठा दिया जाता है आैर यह डर उसके मन में बना रहता है। टीवी, कहानी, फिल्मों के जरिए भी भूत-प्रेत से बच्चों व बड़ों के मन में डर बैठ जाता है। बच्चों में यह डर उसके परिवार से ट्रांसफोर्म होता है। भूत-प्रेत के प्रति यह डर खत्म करने के लिए सेल्फ काउंसलिंग की जरूरत है। गली-मोहल्लों में वर्कशाॅप करने के साथ-साथ उन सोर्सेज को बंद करने की जरूरत है, जहां से भूत-प्रेत की बातें होती हैं।
Published on:
03 Nov 2017 08:12 pm
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