कोटा. 70 साल के आजाद भारत हम इतने आजाद हो चुके है कि एक तरफ हजारों करोड़ो खाकर कोई भी व्यक्ति हमारा देश छोड़कर आराम से जा सकता है। वहीं दूसरी ओर अपने आप को जिदां रखने के लिए बच्चों को खुले आम अपनी जान जोखिम में डाल रहे है। कमोबेश ऐसी स्थिति इसलिए समान है क्येाकि यहां देखरेख करने वाला कोई नही है। राजनीति अपनी सुविधा के समान चलती है, बात तो करते है गरीबों की लेकिन साथ देगे सम्पन्न लोगो का। हम आप को एक ऐसी ही तस्वीर दिखाते है, जहां दुनिया के रंग ओर दस्तूर अलग हैं। फिर ये पापी पेट भी तो भला क्या क्या खेल करवाता है। गरविश्वास न हो तो जरा एक बार मेले दशहरे को देख लीजिए। अपने घर परिवार से दूर पेट के खातिर यहां चले आए है।फिर इन्हें ही देखेंगे तो दांतों तले अंगुलियां दबा लेंगे।