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नवजात बच्चों की मौत के कारण जानने पहुंची केन्द्रीय टीम ने खंगाले रिकॉर्ड

कोटा. नवजात बच्चों की मौत के मामले में जांच के लिए कोटा आई केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम ने रविवार को पांच घंटे से अधिक समय जेके लोन अस्पताल का निरीक्षण किया। उन्होंने एक-एक चीज के रेकॉर्ड को खंगाला। भर्ती बच्चों के टिकटों को चैक किया।

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कोटा

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Deepak Sharma

Dec 14, 2020

नवजात बच्चों की मौत के कारण जानने पहुंची केन्द्रीय टीम ने खंगाले रिकॉर्ड

नवजात बच्चों की मौत के कारण जानने पहुंची केन्द्रीय टीम ने खंगाले रिकॉर्ड

कोटा. नवजात बच्चों की मौत के मामले में जांच के लिए कोटा आई केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम ने रविवार को पांच घंटे से अधिक समय जेके लोन अस्पताल का निरीक्षण किया। उन्होंने एक-एक चीज के रेकॉर्ड को खंगाला। भर्ती बच्चों के टिकटों को चैक किया।

मंत्रालय के नेशनल एडवाइजर डॉ. अरुण सिंह व जोधपुर एम्स से शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह के नेतृत्व में पांच सदस्यीय दल कोटा आया है। दल ने शनिवार शाम को अस्पताल में शिशु रोग विभागाध्यक्ष व अन्य चिकित्सकों की तीन घंटे तक बैठक ली। उसके बाद टीम ने बेड, मरीजों और स्टाफ की संख्या, उपकरणों व अन्य कार्यों की जानकारी ली। टीम रविवार सुबह 9 बजे वापस अस्पताल पहुंची। वहीं, शिवांगी स्वर्णकार के नेतृत्व में गठित राज्य सरकार की टीम ने भी अस्पताल का निरीक्षण किया।

दोनों टीमों ने रेकॉर्ड के अनुसार फैक्टस चैक किए। उन्होंने एनआईसीयू, पीआईसीयू, एनएनडब्ल्यू वार्डों में एक-एक बेड पर जाकर प्रत्येक बच्चे की जानकारी ली। भर्ती बच्चों के रेकॉर्ड को चैक किया। पर्ची पर लिखी दवाइयों तक का रेकॉर्ड देखा। व्यवस्थाओं को लेकर परिजनों से बात की। पुराने व नए भर्ती मरीजों की फाइलें देखी। बाद में राज्य सरकार की टीम लौट गई। टीमों के निरीक्षण के समय मीडिया को अस्पताल के अंदर प्रवेश नहीं दिया गया। निरीक्षण के समय सीएमएचओ डॉ. बीएस तंवर भी पहुंचे।

सीएमएचओ डॉ. तंवर ने बताया कि केन्द्रीय व राज्य की टीमें जेके लोन अस्पताल में बच्चों की मौत के मामले में हर पहलु की पड़ताल कर रही है। बच्चों की मौतों की वास्तविकता का भी पता लगा रही है। टीमें रिपोर्ट बनाकर सरकार को सौंपेगी। उसके बाद सरकार निर्णय लेंगी।


फिर भी एक वार्मर पर दो-दो बच्चे
जेके लोन अस्पताल में 12 बेड का नया नीकू वार्ड बन गया है। वार्ड में लगे वार्मरों पर बच्चों का उपचार भी शुरू हो गया है, लेकिन अभी भी एक-एक वार्मर पर दो-दो बच्चों को रखा जा रहा है। इससे संक्रमण का खतरा बना रहता है।


बदलने लगी तस्वीर
अस्पताल में बड़े अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के लगातार दौरे होने से व्यवस्थाओं में भी परिवर्तन होने लगा है। प्रतिदिन साफ-सफाई करवाई जा रही है। फर्श पर पोछे लग रहे है। टूटी टाइल व खिड़कियों को ठीक करवाया जा रहा है। रंगाई-पुताई का काम भी चल रहा है।

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