
नाले फिर बनेंगे बाढ़ का कारण, क्योंकि...नगर परिषद अब तक गहरी नींद में, टेंडर ही नहीं हुए तो कैसे साफ होंगे नाले
बारां. शहर में बरसाती पानी की सहज निकासी व बाढ़ के पानी से बचाव के लिए नगर परिषद की ओर से अभी तक पुख्ता तैयारी व प्रक्रिया शुरु नहीं की गई है। जबकि मानसून के आने की तिथि 15 जून से मानकर तैयारियां की जाती हैं। शहर को बाढ़ के पानी से बचाव के लिए विशेष तौर से फॉरेस्ट नाले व रामनगर नाले की सफाई की जाती है। मानसून से पहले सभी बड़े व छोटे नाले-नालियों की सफाई के लिए टेण्डर से कार्य करवाया जाता है। लेकिन यदि समय पर प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती है तो सफाई भी अधूरी रहने की आशंका बनी हुई है। मानसून आने की की तारीख में महज 40 दिन शेष बचे हैं। वहीं नगर परिषद की ओर से अभी टेण्डर प्रक्रिया को भी अमलीजामा पहनाने की कवायद तक पूरी नहीं की गई है।
बेशुमार गंदगी से अटे
शहर के प्रमुख नालों में फॉरेस्ट नाला व रामनगर नाला गंदगी व कचरे से अटे हैं। इनकी साफ-सफाई बस मानसून से पहले ही हो पाती है। छोटे नाले-नालियों के हालात भी काफी बदहाल हैं। नगर परिषद सभापति ज्योति पारस का कहना है कि टेण्डर प्रक्रिया शुरू नहीं होने का मुख्य कारण आयुक्त का नहीं होना है। पूर्व आयुक्त मनोज मीना एक केस के चलते फरार हैं। वहीं उनके स्थान पर लगाए गए आयुक्त कमलेश मीना का भी चंद दिनों बाद स्थान्तरण हो गया। अब नई आयुक्त रिंकल गुप्ता ने पदभार संभाला है। अब प्रक्रिया शुरू की जाएगी। संभवत: मंगलवार तक इस मामले में बैठक कर टेण्डर निकालने की प्रक्रिया शुरु कर दी जाएगी। नगर परिषद के सफाई इंस्पेक्टर नरसी स्वामी ने बताया कि टेण्डर के प्रपोजल तो तैयार कर लिए गए हैं। लेकिन इस पर चर्चा कर अनुमोदन किया जाना है। इसके बाद टेण्डर की विज्ञप्ति जारी की जाएगी। गत वर्ष जहां 48 लाख रुपए का टेण्डर हुआ था। इस वर्ष 45 लाख के टेण्डर के लिए प्रपोजल तैयार किया जा रहा है।
सफाई की समस्या
एसआई स्वामी ने बताया कि फॉरेस्ट नाले व रामनगर नाले में कुछ स्थानों से ही गंदगी व कचरा निकाले जाने की स्थिति है। नालों के किनारे मकान बन जाने के कारण जेसीबी मशीन उतारने की जगह नहीं बची है। ऐसे में पूरे नाले की सफाई संभव नहीं हो पाएगी। जनता टॉकीज के समीप से लेकर लकडिय़ों की टाल, गाड़ी अड्डा व नयापुरा में पानी की टंकी के समीप मशीन उतरने की जगह ही नही बची है। भाजपा नगर अध्यक्ष महावीर नामा ने कहा कि नगर परिषद को समय पर चेतकर मानसून से पहले नाले-नालियों की सफाई की जानी चाहिए थी। ताकि आमजन को बरसात में बाढ़ के पानी से राहत मिल सके। गत वर्ष भी देरी से सफाई शुरु होने के कारण पूरी सफाई नहीं हो पाई थी। वहीं नगर परिषद लाखो रुपए खर्च करके तलझड़ सफाई का दावा करती है, लेकिन तस्वीर उलट ही नजर आती है।
नाले-नालियों की तलझड़ सफाई के लिए करीब एक सप्ताह में प्रक्रिया पूरी करके टेण्डर लगा दिए जाएंगे।
रिंकल गुप्ता, आयुक्त नगरपरिषद बारां
Published on:
07 May 2022 11:18 am

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