कांकेर

इंसीनरेटर में ताला, बायो मेडिकल वेस्ट में लगा रहेे आग, लोगों के स्वास्थ्य से हो रहा खिलवाड़

लाखों के बजट से बने इंसीनरेटर में वर्षों से ताला लटक रहा है।

3 min read
Sep 23, 2018
इंसीनरेटर में ताला, बायो मेडिकल वेस्ट में लगा रहेे आग, लोगों के स्वास्थ्य से हो रहा खिलवाड़

कांकेर. पर्यावरण विभाग की बिना अनुमति जिला अस्पताल में लाखों के बजट से बने इंसीनरेटर में वर्षों से ताला लटक रहा है। सौ विस्तर जिला अस्पताल से निकलरहे कचरे को नष्ट करने के लिए मुकम्मल व्यवस्था नहीं होने से लोगों के स्वास्थ्य पर गलत असर पड़ रहा है। आए दिन अस्पताल परिसर में ही मेडिकल वेस्ट को जलाकार नष्ट किए जाने का मामला भी सामने आ रहा है। धू-धू कर जलते मेडिकल वेस्ट से श्यामानगर के लोग परेशान हैं। इसकी लिखित शिकायत करने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन की ओर से रोक नहीं लगाई जा रहा है।

अस्पताल से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट को बाहर फेंकने पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। मेडिकल वेस्ट खुले में फेंकने से लोगों को गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में इंसीनरेटर के माध्यम से मेडिकल कचरा को नष्ट किया जाना अनिवार्य है। जबकि नगर के कोमलदेव जिला अस्पताल में इसका पालन पूरी तरह से नहीं हो रहा है। अस्पताल से निकलने वाले कचरा को परिसर में ही जलाया जा रहा है। जबकि लाखों के बजट से मेडिकल वेस्ट को नष्ट करने के लिए वर्षों पहले यहां इंसीनरेटर को गलत ढंग से बनाया गया है।

इस इंसीनरेटर को आबादी से दूर बनाया जाना था जो जिला अस्पताल प्रबंधन ने नहीं किया। लाखों के बजट से बने इंसीनरेटर का उपयोग नहीं होने के कारण उसमें ताला जड़ दिया गया है। अस्पताल से निकलने वाले कचरे को कभी परिसर में ही गड्ढ़ा खोदकर डाल दिया जाता है तो कभी बाहर ही छोड़ दिया जाता है। शनिवार को भी इसी तरह मोर्चरी के बगल में बायो मेडिकल वेस्ट में अस्पताल के कर्मचारियों ने अल सुबह आग लगा दी। पत्रिका टीम पड़ताल में पहुंची तो अस्पताल परिसर में धू-धू कर मेडिकल वेस्ट जल रहा था। मेडिकल वेस्ट की तस्वीर कैमरे में लेते देख मोहल्ले के लोगों ने कहा आए दिन ऐसे विषैले धुआं से आसपास के लोग परेशान हो रहे हैं। अस्पताल के कचरा में आग लगाने से लोगों के स्वास्थ्य पर गलत असर पड़ रहा है। कुछ लोगों को दमा एवं अन्य बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है।

शिकायत करने के बाद भी रोक नहीं लग रही है। हालांकि इस संबंध में अस्पताल प्रबंधन कुछ बोलने को तैयार नहीं है। पर्यावरण विभाग कीबिना अनुमति लाखों के बजट से बने इस इंसीनरेटर मामले में जिम्मेदार बोल रहे कि मेरे आने से पहले का बनाया गया है। वहीं अस्पताल से निकल रहे मेडिकल वेस्ट लोगों की सेहत पर असर डाल रहा है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी जिला अस्पताल के संबंध में बोलने से इनकार कर दिया।

पर्यावरण को लेकर गंभीर ग्रिन ट्रिब्यूनल न्यायालय (एनजीटी) ने साफ शब्दों में काफी दिनों पहले ही आदेश जारी कर चुका है कि किसी भी कचरे में खुले में आग न लगाएं। इससे पर्यावरण को नुकसान हो रहा है, वहीं आम जनता की जान जा सकती है। कचरे में आग लगाने वालों पर दंडात्मक कार्रवाई किया जाए। एनजीटी ने यह भी आदेश जारी हो चुका है कि बायो मेडिकल वेस्ट को खुले में नहीं डाला जा सकता है। न्यायालय के आदेशों को ठेगा दिखाते हुए अस्पताल में मेडिकल वेस्ट को खुले में डाला जा रहा है और कचरे में आग लगाकर नष्ट किया जा रहा है। यह कचरा लोगों की सेहत खराब कर रहा है।

श्यामानगर के शिकायतकर्ता, आशीष दत्ताराय ने बताया शनिवार को सुबह मेरे घर में विषैले धुआं की गंध आ रही थी। मैं बाहर निकलकर देखा तो इंसीनरेटर के पास मेडिकल वेस्ट जल रहा था। मौके पर गद्दा एवं अन्य सामान पड़ा हुआ था। मैंने कर्मचारियों से पूछा कि इस मेडिकल वेस्ट में आग कैसे लगी है तो कर्मचारियों ने बताया कि इसे नष्ट किया जा रहा है। जबकि इसकी शिकायत लिखित में कलक्टर एवं अस्पताल प्रबंधन को कर चुका हूं कि इस कचरे के धुएं से सेहत खराब हो रही है।

Published on:
23 Sept 2018 10:00 pm
Also Read
View All

अगली खबर