जोधपुर. राजस्थान पर्यटन विभाग एवं यूनेस्कों के संयुक्त तत्वावधान में कालबेलिया संगीत और नृत्य उत्सव कार्यक्रम आगाज हुआ। कार्यक्रम में कालबेलिया नृत्य की इस मौजूद विरासत का जीवंत प्रदर्शन चौपासनी गांव में सुबह 11 से दोपहर 3 बजे तथा जसवंतथड़ा में शाम 4 बजे से 7 बजे तक हुआ।
कार्यक्रम में दर्शक लोक नृत्यांगनाओं के साथ बातचीत की और उनके अनुभव सुने। सुप्रसिद्ध कालबेलिया कलाकार कालूनाथ कालबेलिया, सुवा देवी व आशा सपेरा की कला व मनोरम नृत्य प्रदर्शन किया। यह आयोजन सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने के लिए राजस्थान पर्यटन विभाग की ओर से यूनेस्कों के सहयोग आयोजित किया जा रहा है। दो दिवसीय इस कार्यक्रम के पहले दिन पर्यटक भी कलाकारों के साथ झूमे।क्या है कालबेलिया संस्कृति
कालबेलिया गीत और नृत्य 2010 से मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की यूनेस्को की प्रतिनिधि सूची में शामिल है। स्थानीय भाषा में, ‘काल’ का अर्थ सांप और ‘बेलिया’ का अर्थ दोस्ती है। कालबेलिया एक खानाबदोश समुदाय था जो सपेरे के रूप में जीवनयापन करते था। अब यह समुदाय जोधपुर जिले के चौपासनी, प्रतापनगर और धोला क्षेत्र में रहता है। इस समुदाय की ओर से किए जाने वाले नृत्य सांप की गतिविधियों पर आधारित हैं।