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झाबुआ

Video news-आपणी संस्कृति और परंपरा न वसाड़वा हारु सड़क पर उतरियों आदिवासी समाज

पुलिस कर्मचारियों के आवास निर्माण के लिए आवंटित करने को लेकर विरोध

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झाबुआ. शहर से लगे मौजीपाड़ा क्षेत्र में आदिवासियों की आस्था के केंद्र बाबादेव की जमीन को पुलिस कर्मचारियों के आवास निर्माण के लिए आवंटित करने को लेकर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। मंगलवार को इस मुद्दे पर आदिवासी समाज के सदस्य सड़क पर उतर आए।

उन्होंने बबादेव स्थल से लेकर कलेक्टोरेट तक रैली निकाली। उन्हें रोकने के लिए कलेक्टोरेट परिसर में लगाए बेरिकेड्स की बाधा को तोड़ते हुए वे मुख्य प्रवेश द्वार तक पहुंच गए। ऐसे में प्रशासन को ताबड़तोड़ ताला जड़ना पड़ा। इसके बाद समाजजन ने आधे घंटे तक जमकर नारेबाजी करते हुए प्रशासन को पांच दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि जमीन का आवंटन निरस्त नहीं किया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।दोपहर करीब साढ़े 12 बजे आदिवासी समाज के लोग बाबादेव से रैली के रूप में कलेक्टोरेट पहुंचे। उन्होंने हाथ में बाबादेव बचाओ के नारे लिखी तख्तियां थाम रखी थी। चूंकि मंगलवार होने से जनसुनवाई चल रही थी। इसलिए प्रशासन ने समाजजनों को कलेक्टोरेट परिसर में ही बेरिकेड्स लगाकर आगे बढ़ने से रोक दिया। यहां एसडीएम एचएस विश्वकर्मा ने चर्चा कर उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे कलेक्टर से बात करने को लेकर अड़े रहे। करीब आधे घंटे तक नारेबाजी करने के बाद अचानक भीड़ बेकाबू हो गई। उन्होंने बेरिकेड्स को धक्का देना शुरू कर दिया। पुलिस कर्मियों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन वे कामयाब नहीं हुए। बेकाबू भीड़ बेरिकेड्स को हटाते हुए आगे बढ़ गई। ऐसे में एक जवान तेजी से दौड़ता हुआ मुख्य प्रवेश द्वार पर पहुंचा और वहां ताला लगा दिया। ताकि कोई अंदर दाखिल न हो सके। इसके बाद आदिवासी समाज ने प्रवेश द्वार पर धरना दे दिया। वे लगातार नारेबाजी कर रहे थे। उन्हें समझाने के लिए एडीएम एसएस मुजाल्दा बाहर आए। उधर हालात की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल भी कलेक्टोरेट में बुला लिया। इस दौरान प्रशासन और आदिवासी समाज के बीच बातचीत चलती रही। एडीएम ने कहा आप ज्ञापन देने आए हैं तो दे दीजिए, हम उचित कार्रवाई करेंगे। इस पर समाजजन बोले आप तो अभी घोषणा करें कि हम जमीन आवंटन रद्द करते हैं। उन्होंने कलेक्टर को भी बाहर बुलाने की मांग की। करीब आधे घंटे से अधिक समय तक दोनों पक्षों के बीच चली चर्चा के बाद आदिवासी समाज ने प्रशासन को पांच दिन का अल्टीमेटम दे दिया। साथ ही कहा कि यदि इस अवधि में बाबा देव की जमीन का आवंटन निरस्त नहीं किया जाता तो छटे दिन से उग्र आंदोलन करेंगे। इसकी संपूर्ण जवाबदारी प्रशासन की रहेगी।

प्रदर्शन में युवक कांग्रेस के जिलाध्यक्ष विजय भाबर, आम आदमी पार्टी के जिला सचिव कमलेश सिंगाड़, जयस के विजय भाबर, पार्षद एवं तड़वी धूमा डामोर आदि मौजूद थे।

यह है आदिवासी समाज की मांग-1. पुलिस कर्मचारियों के आवास निर्माण के लिए आवंटित की गई जमीन के आदेश को निरस्त किया जाए।

2. मौजीपाड़ा गांव के सर्वे नंबर 75 को बाबादेव का स्थान घोषित कर आदेश पत्र प्रदान किया जाए।3. राज्यपाल से भारतीय संविधान के अनुच्छेद 244 (1)(5) के तहत जनजाति क्षेत्र में नगरीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांवों में अपनी परंपराओं तथा रूढ़ियों, उनकी सांस्कृतिक पहचान और सामुदायिक संसाधनों तथा विवादों के निराकरण की रूढ़ीगत रीतियों को सुरक्षित व संरक्षित करने का कानून बनाकर संबंधित कलेक्टर और राज्य सरकार के संबंधित विभागों को निर्देशित करने की मांग की।

क्यों है विरोध-मौजीपाड़ा क्षेत्र में सर्वे नंबर 75 की 2 हेक्टेयर जमीन पुलिस कर्मचारियों के आवास गृह निर्माण के लिए आवंटित की गई है। इस जमीन के एक हिस्से में वर्षो से आदिवासी समाज की आस्था का केंद्र बाबा देव का स्थान है। जहां आसपास के 10 गांव के ग्रामीण अपनी परंपरा का निर्वहन करने के लिए आते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जनजाति समाज की आदिकाल से चली आ रही परंपराओं के केंद्र को क्षतिग्रस्त कर प्रशासन ने पुलिस कर्मचारियों के आवास गृह का निर्माण करना न्यायोचित नहीं है। उन्होंने कहा झाबुआ एक जनजाति बाहुल्य जिला है और यहां भील जनजाति निवास करती है। बाबादेव जन-जन के देवता हैं और सबसे बड़ा आध्यात्मिक केंद्र भी है।