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देखिए,किताबों की दुुनियां..यहां दुुनियांभर की किताबें

रेगिस्तान के सुदूर धोरों में एक संत ने किताबों की दुनियां 43 साल पहले किताबों की ऐसी दुनियां बसाई है कि अब यहां यहां लाखों पुस्तकें संग्रहित है। पढऩे के लिए यहां 04 हजार लोग एक साथ बैठ सकते है। 16000 फीट लंबी रैंक में रखी इन पुस्तकों के पुस्तकालय को देखने हजारों लोग पहुुंचते है। यहां आने वाले लोगों के जुबान से एक ही बात निकलती है, इतनी किताबें एक साथ हमने तो नहीं देखी।

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bhadariya

रेगिस्तान के सुदूर धोरों में एक संत ने किताबों की दुनियां 43 साल पहले किताबों की ऐसी दुनियां बसाई है कि अब यहां यहां लाखों पुस्तकें संग्रहित है। पढऩे के लिए यहां 04 हजार लोग एक साथ बैठ सकते है। 16000 फीट लंबी रैंक में रखी इन पुस्तकों के पुस्तकालय को देखने हजारों लोग पहुुंचते है। यहां आने वाले लोगों के जुबान से एक ही बात निकलती है, इतनी किताबें एक साथ हमने तो नहीं देखी।

43 वर्ष पूर्व शुरूआत

सन् 1981 में जगदम्बा सेवा समिति के संस्थापक व क्षेत्र के प्रसिद्ध संत हरवंशसिंह निर्मल उर्फ भादरिया महाराज ने पुस्तकालय की नींव रखी थी।एक करोड़ से अधिक कीमत की विभिन्न तरह की साहित्यक, ऐतिहासिक, ज्ञानवद्र्धक व विधि से संबंधित पुस्तकें उपलब्ध है और पुस्तकों के संग्रह का कार्य निरंतर रूप से आज भी जारी है।

संग्रह विशेष

- विश्व के कुल 11 धर्मों में से सात धर्मों का सम्पूर्ण साहित्य

-कानून की पुस्तकें

- वेदों की सम्पूर्ण शृंखलाएं

- भारत का संविधान

- विश्व का संविधान

- जर्मन लेखक एफ मैक्स मुलर की रचनाएं

- पुराण, एन साइक्लोपिडिया की पुस्तकें

- आयुर्वेद, इतिहास, स्मृतियां, उपनिषेद, देश के प्रधानमंत्रियों के भाषण विभिन्न शोध की पुस्तकों सहित हजारों तरह की पुस्तकें यहां उपलब्ध है।

यह है व्यवस्था

- 562 अलमारियां

- 16 हजार फीट की रेंक

- 18 कमरों में दुर्लभ पुस्तकों की माइक्रो सीडी

- 04 गैलेरियां ,02की लंबाई 275 फीट व 02 करीब 370 फीट

- 60 गुणा 365 फीट का हॉल अध्ययनन के लिए

-4000 लोगों के एक साथ बैठकर पढऩे की व्यवस्था