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राजस्थान को मिलेगी बिजली की 4 नई यूनिट, इस तरह 5 करोड़ यूनिट बिजली मिलेगी

राज्य में 2325 मेगावाट क्षमता की चार बिजली यूनिट तैयार होगी

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राजस्थान को मिलेगी बिजली की 4 नई यूनिट, इस तरह 5 करोड़ यूनिट बिजली मिलेगी

राजस्थान को मिलेगी बिजली की 4 नई यूनिट, इस तरह 5 करोड़ यूनिट बिजली मिलेगी

भवनेश गुप्ता
जयपुर। राज्य में 2325 मेगावाट क्षमता की चार बिजली यूनिट तैयार होगी। इसमें एक यूनिट लिग्नाइट आधारित भी है। इनसे हर दिन करीब 5 करोड़ यूनिट बिजली का उत्पादन होगा। सरकार की बजट घोषणा के बाद राज्य विद्युत उत्पादन निगम ने इसकी तैयारी तेज कर दी है। इसमें छबड़ा थर्मल प्लांट मे ही 660-660 मेगावाट की दो और कालीसिंध-झालावाड प्लांट में 800 मेगावाट की एक अतिरिक्त यूनिट होगी। दोनों ही प्लांट में बनने वाली ये यूनिट अल्ट्रा सुपरक्रिटिकल तकनीक पर आधारित होगी। खास यह है कि इन यूनिटों से बिजली उत्पादन दर 4.75 से 5.25 रुपए प्रति यूनिट (फिक्स व वेरिएबल चार्ज) पड़ेगी। उत्पादन निगम ने यह आकलन किया है। हालांकिय यह दर बाजार दर के अनुपात में काफी महंगी है।

प्रस्तावित यूनिट और उसकी स्थिति
1. छबड़ा थर्मल प्लांट : अल्ट्रा सुपरक्रिटिकल तकनीक आधारित नई यूनिट तैयार होगी। इससे हर दिन 2.99 करोड़ यूनिट बिजली उत्पादन हो सकेगा। मौजूदा प्लांट में ही विस्तार होगा।
-यूनिट संख्या- 2
-क्षमता- 660-660 मेगावाट
-लागत- 9600 करोड़ रुपए

2. कालीसिंध-झालावाड़ प्लांट : यहां भी अल्ट्रा सुपरक्रिटिकल तकनीक पर नई यूनिट बनाई जाएगी। नई यूनिट से हर दिन 1.81 करोड़ यूनिट बिजली उत्पादन हो सकेगा। इस प्लांट में यह तीसरी यूनिट होगी।
-यूनिट संख्या- 1
-क्षमता- 800 मेगावाट
-लागत- 6000 करोड़ रुपए

3. गुढ़ा बीकानेर : सरकार का फोकस सस्ती बिजली उत्पादन के लिए लिग्नाइट आधारित थर्मल पॉवर प्लांट की तरफ भी है। इस प्रस्तावित प्लांट से हर दिन 26 लाख यूनिट उत्पादन होगा। साथ ही 3.79 रुपए प्रति यूनिट दर उत्पादन दर का आकलन किया गया है। हर साल एक मिलीयन मीट्रिक टन लिग्नाइट उपयोग होगा। गुढ़ा वेस्ट में 10 लाख प्रतिटन लिग्नाइट उत्पादन क्षमता की खदान है, जो अभी राजस्थान राज्य माइंस व मिनरल के पास है।
-यूनिट संख्या- 1
-क्षमता- 125 मेगावाट
-लागत- 950 करोड़ रुपए

सस्ती बिजली के लिए यह भी जरूरी
-बिजली मांग के पीक आॅवर्स (सुबह 5 से 9 बजे और शाम साढ़े पांच से रात 10 बजे) के बीच कम लागत की यूनिट से उत्पादन बढ़ाई जाए।
-सोलर और विंड एनर्जी के उत्पादन पर निर्भरता अधिक हो।
-आवश्यकता होने पर बाजार से सस्ती दर पर बिजली खरीदने की भी रणनीति बने।
-राज्य में अक्षय ऊर्जा के उत्पादन बढ़ाने पर फोकस हो। 2 हजार मेगावाट क्षमता के सोलर पार्क की जगह इसकी क्षमता 4 हजार मेगवाट तक हो तो बात बने। इससे सस्ती दर पर ज्यादा से ज्यादा अक्षय ऊर्जा मिल पाएगी।