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सरकार का पहला अध्यादेश माननीयों के पक्ष में, पूर्व मंत्री जाट की कुर्सी बचाने को लाया गया अध्यादेश

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सरकार का पहला अध्यादेश माननीयों के पक्ष में, पूर्व मंत्री जाट की कुर्सी बचाने को लाया गया अध्यादेश

शैलेन्द्र अग्रवाल / जयपुर। राज्य की नई सरकार के पहला अध्यादेश करीब 7 साल पहले एक महिला की संदिग्ध मौत से जुड़े विवाद में मंत्री पद गंवाने वाले विधायक रामलाल जाट की जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ अध्यक्ष पद की कुर्सी बचाने के लिए लाया गया है। सहकारिता अधिनियम में संशोधन का अध्यादेश नहीं आता तो जाट को भीलवाड़ा जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ता। सहकारिता अधिनियम में संशोधन के लिए जारी अध्यादेश से अब विधायक-सांसद सहकारी समितियों के अध्यक्ष बने रह सकेंगे। अब केवल केन्द्र या राज्य सरकार में मंत्री, जिला प्रमुख और प्रधान को ही सहकारी समिति अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ेगा।

राज्य सरकार ने अध्यादेश के जरिए सहकारी समितियों के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष बने रहने के लिए 2013 के कानून की बहाली का प्रावधान कर दिया है। राज्यपाल कल्याण सिंह की मंजूरी के बाद यह अध्यादेश जारी किया गया है। मौजूदा सरकार के पहले अध्यादेश के जरिए भाजपा सरकार के समय 2016 में सहकारी समितियां अधिनियम में हुए संशोधन के कुछ प्रावधानों को समाप्त कर दिया है। इससे अब सांसद-विधायक, उपप्रमुख, उपप्रधान, सरपंच, उप सरपंच या किसी नगरपालिका निकाय अध्यक्ष या उपाध्यक्ष सहकारी समिति का अध्यक्ष या उपाध्यक्ष बने रह सकेंगे।

जाट 2016 में बने थे जिला अध्यक्ष
पूर्वमंत्री रामलाल जाट 30 जनवरी 2016 को भीलवाड़ा जिला दुग्ध उत्पादक सरकारी संघ लिमिटेड के निर्विरोध अध्यक्ष निर्वाचित हुए। जाट समर्थक 12 डायरेक्टर की इकतरफा जीत के बाद जाट ने डेयरी अध्यक्ष पद का नामांकन पेश किया। बाकी 11 डायरेक्टर जाट समर्थित होने से केवल जाट का ही नामांकन पेश हुआ। जांच के बाद जाट को निर्विरोध अध्यक्ष घोषित कर दिया गया था। यह चुनाव हाईकोर्ट के आदेश पर हुए थे। इसके चलते निर्वाचन कार्रवाई पूरी होने के अगले दिन इस चुनाव की रिपोर्ट जाट के निर्वाचित घोषित करने के साथ ही सरकार को भेज दी गई। जाट डेयरी के तीसरी बार अध्यक्ष बने हैं।

पिछली सरकार ने किया था संशोधन

पिछली सरकार ने 2016 में सहकारिता अधिनियम में संशोधन कर उपरोक्त पदों पर निर्वाचित व्यक्ति के निर्वाचन के 14 दिन बाद सहकारी समिति अध्यक्ष या उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की बाध्यता कर दी थी।

2013 में यह प्रावधान किया
केन्द्र या राज्य सरकार में मंत्री, जिला प्रमुख या प्रधान सहकारी समिति का अध्यक्ष चुने जाने पर 14 दिन बाद समिति अध्यक्ष पद पर नहीं रह पाएगा। इसी तरह समिति का अध्यक्ष केन्द्र सरकार या राज्य सरकार में मंत्री, जिला प्रमुख या प्रधान बन जाए, तो वह भी 14 दिन बाद समिति अध्यक्ष नहीं रह पाएगा।

2016 में यह प्रावधान जोड़ दिया

सांसद-विधायक, जिला प्रमुख या उप प्रमुख, प्रधान या उप प्रधान, सरपंच या उप सरपंच, किसी नगरपालिका निकाय का अध्यक्ष या उपाध्यक्ष है तो वह अपने निर्वाचन के 14 दिन बाद सहकारी समिति का अध्यक्ष या उपाध्यक्ष पद पर नहीं रह सकेगा। सहकारी समिति अध्यक्ष या उपाध्यक्ष बने रहने के लिए ऐसे व्यक्ति को सांसद, विधायक, जिला प्रमुख या उप प्रमुख, प्रधान या उप प्रधान, सरपंच या उप सरपंच, किसी नगरपालिका निकाय का अध्यक्ष या उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा देना होगा।