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नए विधायकों से शहर को आस…बीआरटीएस का तय हो भविष्य, मेट्रो का भी हो विस्तार

जयपुर के अन्य विधानसभा क्षेत्रों में भी स्थानीय समस्याओं का जनप्रतिनिधि निकाले हल, बीआरटीएस की उपयोगिता पर वर्षों से खड़े हो रहे सवाल, मेट्रो फेज टू भी कागजों से नहीं आया बाहर    

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नए विधायकों से शहर को आस...बीआरटीएस का तय हो भविष्य, मेट्रो का भी हो विस्तार

नए विधायकों से शहर को आस...बीआरटीएस का तय हो भविष्य, मेट्रो का भी हो विस्तार

राजधानी के लोगों को नए विधायकों से पुरानी समस्याओं के हल होने की उम्मीद है। शहर में कई ऐसे प्रोजेक्ट हैं, जो धरातल पर आ जाएं तो शहरवासियों को राहत मिल सकती है। इसमें मेट्रो ट्रेन का दूसरा चरण और गोविंद मार्ग पर एलिवेटेड रोड शामिल है। वहीं, बीआरटीएस कॉरिडोर का भविष्य अब तक तय नहीं हो पाया है। ऐसे में सीकर रोड, अजमेर रोड और न्यू सांगानेर रोड पर बने कॉरिडोर सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। इसके अलावा शहर के विधानसभा क्षेत्रों में भी स्थानीय समस्याएं राह में रोड़ा बनी हुई हैं।


वर्षों से कॉरिडोर खाली, हादसे हो रहे
बीआरटीएस कॉरिडोर बनाने में करोड़ों रुपए खर्च कर दिए। लेकिन, अब तक उपयोग शुरू नहीं हो पाया। कॉरिडोर की वजह से सीकर रोड, अजमेर रोड और न्यू सांगानेर रोड पर आए दिन हादसे होते हैं। कई लोगों की जान भी जा चुकी है। जेडीए अधिकारियों की मनमानी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जून में सरकार ने कॉरिडोर की उपयोगिता को लेकर रिपोर्ट बनाने को कहा। लेकिन, जेडीए ने अब तक काम शुरू नहीं करवाया।

बारह साल से सिर्फ चर्चा
वर्ष 2011 में गोविंद मार्ग पर वाहनों के बढ़ते दबाव को देखते हुए एलिवेटेड रोड का प्लान बनाया गया। बारह वर्ष से चर्चा ही हो रही है। यदि एलिवेटेड रोड धरातल पर आ जाए तो रोज लाखों लोगों की राह सुगम हो सकती है। नारायण सिंह तिराहे से मनोचिकित्सालय, सेठी कॉलोनी तक एलिवेटेड रोड प्रस्तावित है।


मेटो ट्रेन: दूसरा चरण अधर में
जयपुर मेट्रो का दूसरा चरण अधर में है। कांग्रेस सरकार लगातार केंद्र सरकार पर सहयोग न करने का आरोप लगाती रही। हालांकि, तीसरी बार बनी डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट में लाइट मेट्रो मोड पर काम होगा। राज्य में भाजपा की सरकार बनने के बाद ऐसा माना जा रहा है कि केंद्र सरकार मेट्रो के विस्तार को गति दे सकती है।

हर विधानसभा क्षेत्र में हैं बड़े मुद्दे
मालवीय नगर:
जर्जर सीवर लाइन और करतारपुरा नाले का एक हिस्सा कच्चा है।
किशनपोल और हवामहल: सीवर लाइन जर्जर होने के कारण लोग परेशान हैं। ट्रैफिक का दबाव भी बढ़ रहा है।
झोटवाड़ा: पृथ्वीराज नगर इलाके में सीवर लाइन की दरकार है। सैकड़ों कॉलोनियों में सड़कें नहीं हैं।सांगानेर: अजमेर रोड की कई कॉलोनियों में बरसात के दिनों में जलभराव बड़ी समस्या है।
विद्याधर नगर: सीकर रोड पर वर्षों से पानी भरता रहा है। निकासी न होने से बरसात के दिनों में यातायात ठहर जाता है।
आदर्श नगर: ट्रैफिक का दबाव और कच्ची बस्तियों में रहने वाले लोगों को घर का इंतजार है।


सार्वजनिक परिवहन और मूलभूत सुविधाएं बढ़ाने पर हो जोर
ट्रैफिक का दबाव राजधानी की सड़कों पर बढ़ता जा रहा है। ऐसे में सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना सरकार की प्राथमिकता में शामिल होना चाहिए। इसके लिए मेट्रो का विस्तार हो और सिटी बसों की संख्या बढ़े। ऐसा होने से लोग निजी वाहनों की तरफ कम जाएंगे। कई देशों ने सार्वजनिक परिवहन को मजबूत किया है। ऐसे में वहां लोग वाहन खरीदना कम पसंद करते हैं। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय समस्याएं भी हैं। इनका निस्तारण भी जरूरी है। इसके लिए जनप्रतिनिधि को शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म योजना बनानी होगी।
-चंद्रशेखर पाराशर, सेवानिवृत्त, अतिरिक्त मुख्य नगर नियोजक