
पतंग कारोबार को लगे पंख, बिक्री के सारे रिकॉर्ड टूटे, शहर में हर रोज मकर संक्रांति
Makar Sankranti 2023: राजस्थान में संक्रांति पर होने होने वाली पतंगबाजी देश ही नहीं विदेशों में भी खासी लोकप्रीय है। इस साल मकर संक्रांति पर 25 करोड़ के कारोबार को पंख लगेंगे। इस बार ठंड के कारण स्कूल बंद होने की वजह से बच्चे ज्यादातर समय पतंग उड़ाने में निकाल रहे है, जिसका सीधा असर इसकी डिमांड पर पड़ रहा है। इस साल की बिक्री ने पिछले कई सालों की रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इस बार नए साल के साथ ही शहर में हर रोज मकर संक्रांति जैसा माहौल बना हुआ है। पतंगों की मांग ने कोरोना काल के बाद एक बार फिर व्यापारियों के चेहरे खिला दिया है। इस साल संक्रांति पर जयपुर में करीब 15 करोड़ रुपए का पतंग डोर का कारोबार होने की उम्मीद है। पूरे राजस्थान की बात करें तो पतंग डोर का करीब 25 करोड़ रुपए का होगा। इसमें से जयपुर में ही संक्रांति और इसके आसपास करीब 15 करोड़ रुपए का कारोबार होता है। जयपुर में दो से तीन हजार कारीगर पतंग बनाने के कारोबार से जुड़े हैं।
लघु उद्योग का दर्जा देने की मांग
जयपुर में पतंग व्यापारी लंबे समय से ऐसे लघु उद्योग का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने अभी तक इस मांग पर ध्यान नहीं दिया है। ज्यादातर पतंग रामगंज के हांडीपुरा और दिल्ली रोड पर ईदगाह के आसपास बनाई जाती हैं। जयपुर पतंग उद्योग के अध्यक्ष संजय गोयल ने बताया कि पतंग बनाने में ज्यादातर अल्पसंख्यक वर्ग की महिलाएं शामिल हैं। फिर भी बरेली से आने वाली पतंग डोर का कारोबार ज्यादा है। अभी भी जयपुर में करीब 70 फीसदी पतंग और मांझा, चरखी बरेली से ही आते हैं।
पिछले साल से 40 फीसदी तक महंगी पतंग डोर
व्यापारियों का कहना है इस बार कच्चा माल महंगा होने से पतंग डोर की कीमतों में 35 से 40 फीसदी की तेजी आई है। बाजार में बरेली के मांझे व पतंगों की अधिक मांग है। ये पतंगें 7 रुपए से लेकर 50 रुपए तक बिक रही है। मांझे का एक चरखा 400 रुपए से लेकर 4000 रुपए में बिक रहा है। इस बार पतंगों की अच्छी बिक्री हो रही है। सुबह से ही बाजारों में पतंगों के खरीददार आने लगे हैं, रात तक दुकानों पर ग्राहकी हो रही है।
पतंगों का पुश्तैनी काम
शहर में सबसे अधिक बाहर के व्यापारी हांडीपुरा में दुकानें किराए पर लेकर मांझा-पतंग बेचने का काम कर रहे हैं। इनमें कई पतंग व्यापारियों का यह काम पुश्तैनी है। वे पीढि़यों से मांझा व पतंग बेचने का काम कर रहे हैं। दुकानदारों की मानें तो शहर में बिक रहा मांझा कांच, कैमिकल, चावल आदि से बनाया जा रहा है। बाजार में अधिक ‘धारदार’ मांझा महंगा बिक रहा है।
ऑनलाइन भुगतान का ट्रेंड
इस बार पतंग बाजार में ऑनलाइन भुगतान का ट्रेंड भी देखने को मिल रहा है। दुकानदार नकद की बजाय पेटीएम, क्रेडिट कार्ड आदि से भुगतान ले रहे हैं। जयपुर से हांडीपुरा व चांदपोल और किशनपोल बाजार के अलावा हल्दियों का रास्ता में होलसेल रेट में भी पतंगे बिक रही है।
Published on:
13 Jan 2023 11:16 am
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