
Grater Nagar Nigam Year Ender : जब महापौर को सरकार ने ही कर दिया निलंबित, निगम इतिहास का पहला मामला
जयपुर।
नगर निगम ग्रेटर के लिए साल 2021 का सबसे बड़ा कांड महापौर पद से सौम्या गुर्जर का निलंबन है। निगम इतिहास की यह पहली घटना है, जब सरकार ने बड़ा एक्शन लेते हुए सीधे महापौर को निलंबित कर दिया।
4 जून को ग्रेटर निगम मुख्यालय में सारी घटना हुई। एक बैठक के दौरान आयुक्त यज्ञमित्र सिंह देव उठकर जाने लगे तो महापौर व आयुक्त में विवाद हो गया। बीवीजी कंपनी के पेमेंट की फाइल पर आयुक्त ने हस्ताक्षर से मना किया और उठकर जाने लगे तो कुछ पार्षदों ने उन्हें जाने नहीं दिया। इस दौरान आयुक्त-पार्षदों के बीच बहस हो गई। आयुक्त ने आरोप लगाया कि पार्षदों ने उनके साथ मारपीट की। मामला सरकार के पास पहुंचा और तीसरे दिन ही सरकार ने मेयर और तीन अन्य पार्षदों अजय सिंह चौहान, पारस जैन और शंकर शर्मा को निलंबित कर दिया। इनके खिलाफ ज्योति नगर थाने में मुकदमा भी दर्ज करवाया गया। उधर, निलंबित महापौर के पति का भी बीवीजी कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ पैसे लेन—देन का कथित वीडियो वायरल हुआ, जिसे लेकर एसीबी ने उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया था।
हाईकोर्ट से झटना, सुप्रीम कोर्ट में एक फरवरी को सुनवाई
सरकार के इस फैसले खिलाफ सौम्या गुर्जर ने राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मगर कोई राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट जस्टिस चंद्र कुमार सोनगरा और पंकज भंडारी ने सरकार के सस्पेंशन के आदेशों पर स्टे देने से मना करते हुए सरकार को 6 माह के अंदर मामले की न्यायिक जांच पूरी करके रिपोर्ट देने के लिए कहा। फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। आखिरी सुनवाई 7 दिसंबर को हुई, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने स्टे देने से इंकार करते हुए अगली सुनवाई 1 फरवरी को करने की बात कही है।
Published on:
26 Dec 2021 08:20 pm

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