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कांग्रेस सरकार ने भाजपा की शील धाभाई को कार्यवाहक महापौर के लिए 60 दिन और दिए

स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल ने दी स्वीकृति

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कांग्रेस सरकार ने भाजपा की शील धाभाई को कार्यवाहक महापौर के लिए 60 दिन और दिए

कांग्रेस सरकार ने भाजपा की शील धाभाई को कार्यवाहक महापौर के लिए 60 दिन और दिए

भवनेश गुप्ता

जयपुर। स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल ने जयपुर नगर निगम ग्रेटर की कार्यवाहक महापौर शील धाभाई का कार्यकाल 60 दिन और बढ़ा दिया है। स्वायत्त शासन विभाग ने बुधवार को आदेश जारी कर दिए। बताया जा रहा है कि मंत्री ने कार्यकाल बढ़ाने से पहले धाभाई की कार्यप्रणाली, उनके भाजपा व कांग्रेस विधायकों के क्षेत्र से जुड़े कार्यों की जानकारी ली। नगरपालिका अधिनियम के तहत कार्यवाहक महापौर का शुरुआती कार्यकाल 60 दिन का होता है और उसके बाद उसमें बढ़ोत्तरी का अधिकार सरकार के पास रहता है। सरकार पहले ही एक बार कार्यकाल बढ़ा चुकी है। कार्यकाल 5 अक्टूबर को पूरा हो रहा था। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने सौम्या गुर्जर को निलंबित कर शील भाई के कार्यवाह महापौर बनाने के आदेश 7 जून को जारी किए थे।


इसका दिया हवाला
-वरिष्ठ सदस्य
-अनुभव
-राजनैतिक दल का अनुभव

बोर्ड को अधिकार देने से बच रही सरकार
सरकार चाहे तो यह अधिकार बोर्ड को भी दे सकती थी, लेकिन गेंद भाजपा के पाले में डालना नहीं चाहती। ऐसा हुआ तो संभव है कि बोर्ड दूसरा कार्यवाहक महापौर तय कर दे। अंदरखाने चर्चा है कि सरकार खुद के स्तर पर तय किए गए नाम को ही आगे बढ़ाना चाह रही थी।

फ्रंटफुट पर खोलने की बजाय धीरे कदम बढ़ा रहीं धाभाई
शील धाभाई फ्रंटफुट पर खेलने की की बजाय धीरे-धीरे कदम बढ़ा रही है। शुरुआत में भाजपा विधायकों से मिलने और उनके क्षेत्र में दौरा करने का सिलसिला चला, लेकिन धाभाई को अंदाजा हो गया कि यह सरकार को रास नहीं आ रहा। इसी बीच यह सिलसिला थम सा गया। अब चर्चा तो हो रही है लेकिन खुले मंच पर नहीं।

यह है नगरपालिका एक्ट
-नगरपालिका अधिनियम के तहत राज्य सरकार 60 दिन के लिए कार्यवाहक महापौर बना सकती है। हालांकि, परिस्थितियों को देखते हुए यह कार्यकाल आगे भी बढ़ाया जा सकता है। प्रदेश में कई जगह ऐसे मामलों में सरकारों ने 6़ से 8 माह तक कार्यकाल बढ़ाया है।
-नगर निगम ग्रेटर मामले में निलंबित महापौर ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की हुई है। वहीं दूसरी ओर सरकार न्यायिक अधिकारी से भी जांच करा रही है। इस मामले में जब तक निर्णय नहीं हो जाता, तब तक महापौर के चुनाव भी संभव नहीं है।

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