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पीठासीन अधिकारी सम्मेलन शुरू, धनखड़ से लेकर बिरला तक बोले, विधायिका में न्यायपालिका का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं

अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों का दो दिवसीय सम्मेलन बुधवार से राजस्थान विधानसभा में शुरू हुआ।

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जयपुर

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Rahul Singh

Jan 11, 2023

पीठासीन अधिकारी सम्मेलन शुरू, धनखड़ से लेकर बिरला तक बोले, विधायिका में न्यायपालिका का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं

पीठासीन अधिकारी सम्मेलन शुरू, धनखड़ से लेकर बिरला तक बोले, विधायिका में न्यायपालिका का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं

अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों का दो दिवसीय सम्मेलन बुधवार से राजस्थान विधानसभा में शुरू हुआ। सम्मेलन में वक्ताओं ने संविधान की भावना बनाए रखने, विधायिका की स्वायत्ता, न्यायपालिका के बढ़ते अनावश्यक हस्तक्षेप और सरकार से टकराव सहित कई बिंदुओं पर अपनी बात कही। साथ ही यह भी कहा कि लोकतंत्र के तीनों अंग अपनी अपनी भूमिका का सही तरीके से निर्वहन करें और जनता की समस्याओं को दूर करने पर काम करें। सम्मेलन का उद्घाटन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने किया। इस मौके पर सीएम अशोक गहलोत, स्पीकर सीपी जोशी, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश सिंह, विपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया मौजूद थे।

सदन में डिबेट करने की जरूरत :

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि हमें सदन में व्यापक बहस करने की जरूरत है लेकिन हम कर क्या रहे हैं। संसद और विधानसभाओं में अशोभनीय घटनाएं हो रही हैं और ऐसे में हमें अपने घर का रास्ता ठीक करना होगा। धनखड़ ने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत रह पाएगा जब तीनों अंग अपना काम सही तरीके से करेंगे। आज विधानसभा या संसद में प्रभावी लोग है। संसद और विधानसभा जो कानून बनाती हैं तो न तो इसे न्यायपालिका देख सकती हैं न ही कार्यपालिका। लेकिन कई बार न्यायपालिका इसे निरस्त कर देती हैं ऐसे में विधानमंडल की स्वायत्ता कैसे रह पाएगी।

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने इस मौके पर कहा कि अमृत महोत्सव के समय ये कार्यक्रम किया जा रहा है। ये बहुत खुशी की बात है। भारत को जी 20 की मेजबानी मिली हैं। ये हमारे लोकतंत्र की मजबूती हैं। दुनिया मे भारत का महत्व बढ़ा हैं। उन्होंने कहा लोकतंत्र एक मंदिर हैं। संसद और विधानमण्डल की जिम्मेदारी हैं कि कैसे ये मजबूत बने। उन्होंने कहा कि आज कानून और संविधान की शपथ लेने वाले सदन में कैसा आचरण करते है। ये हमें भेजने वाले भी देखते होंगे। इस मन्दिर को हमने क्या कर दिया। हमारी जिम्मेदारी हैं कि हमें इसका सही रास्ता निकालना होगा। आज पीठासीन अधिकारी के पास कई मुद्दे आते हैं और उनके सामने ये चुनौती भी हैं किे वे इसे कैसे ठीक करें।

कानूनों के जल्दी पास करने पर स्पीकर बिरला ने जताई चिंता:

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि शिमला में पीठासीन अधिकारी सम्मेलन हुआ था। उसमें कई विषयों पर विचार विमर्श हुआ। इसके बाद संसद और विधानमंडल में प्रक्रियाओं को लेकर बदलाव किए गए। बदलते परिदृश्य में किस तरह से लोकतंत्र और सदन को मजबूत कर सकते है। इन पर चर्चा होती आई हैं। लोकतंत्र भारत की अवधारणा और विचारधारा हैं। दुनिया हमें देख रही हैंं। जी 20 का सम्मेलन हो रहा हैं। लोकतंत्र की जननी भारत हैं। सदन को मजबूत, उत्तरदायी होना चाहिए। जनता की समस्याओं पर चर्चा हों, कानूनों पर चर्चा हो और इसमें भी जनता की भागीदारी हो। बिरला ने कहा कि हमें चिंतन करने की जरूरत है कि 75 साल बाद भी सदन में शालीनता की बात करनी पड़ रही हैं। सदन में जनप्रतिनिधियों को शालीनता रखनी चाहिए। आज विधायिका में कानून जल्दी पास हो रहे हैं। इस पर बहस होने की जरूरत हैं। जनता का विश्वास सदन के प्रति बढ़ाने की जरूरत है। संविधान में जो मर्यादा दी हैं उसका न्यायपालिका भी पालन करें।
संसद ने हमेशा उनका सम्मान किया है। हम जनता का भरोसा बनाए रखने का प्रयास कर रहे हैं। हम जनता की उम्मीदों पर खरे उतरेंगे।

कई बार लगा कि अदालतें हस्तक्षेप कर रही हैं:

सीएम अशोक गहलोत ने सम्मेलन में कहा कि पहली बार लोकसभा और राज्यसभा के चेयरमैन राजस्थान के हैं। ये विधायक भी रहे। ये हमारा सौभाग्य हैं।दो दिन तक ये सम्मेलन चलेगा। सभी अपने अनुभव बताएंगे। सीपी जोशी क्रांतिकारी नेता है। इनके समय कई नवाचार हुए है। विधायकों के लिए नए फ्लैट बन रहे है। विधानसभा में म्यूजियम बनाया है। ये बहुत शानदार काम किया गया है।
उन्होंने कहा कि पहले पीएम नेहरू के समय विपक्ष के श्यामाप्रसाद और कई अन्य नेता कैबिनेट में लिए गए थे। हाउस में पक्ष और विपक्ष का महत्व हैं। हाउस कैसे अच्छे से चले, ये स्पीकर का काम हैं ये चुनौती हैं।उन्होंने कहा कि आज सोशल मीडिया का जमाना हैं। कार्यपालिका और विधायिका को कई बार लगता हैं कि न्यायपालिका हस्तक्षेप करती हैं लेकिन फिर भी 75 साल बाद भी तीनो अंग अपना काम कर पा रहे हैं ये हमारी पहचान है। सदन में शोर शराबे से कई बार परेशानी होती हैं। पक्ष विपक्ष अपनी अपनी बात कहता हैं।

विधानमंडलों को मिले वित्तीय स्वायत्तता

विधानसभा अध्यक्ष डॉ जोशी ने कहा कि सदन ज्यादा दिन चले इसके लिए कानून बनाया जाना चाहिए। वहीं विधानमंडलों को सशक्त करने के लिए उन्हें वित्तीय स्वायत्तता देने की भी आवश्यकता है। वहीं न्यायपालिका और विधायिका के बीच संबंध बेहतर रहे इस बारे में भी विचार करने की ज़रुरत है। उन्होंने उद्बोधन के दौरान सीएम गहलोत से राजस्थान विधानसभा को देश में पहला वित्तीय स्वायत्तता वाली विधानसभा बनाने का आग्रह किया।

स्पीकर को सदन बुलाने का अधिकार नहीं, दुर्भाग्य
विधानसभा अध्यक्ष डॉ जोशी ने स्पीकर की भूमिका पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ये दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि विधानसभा स्पीकर को सदन बुलाने तक का अधिकार नहीं है। स्पीकर का काम सिर्फ सदन चलाने का ही है। जोशी ने सम्मेलन में स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि ये गौरव का विषय है कि इस बार के पीठासीन अधिकारी सम्मेलन की मेजबानी राजस्थान कर रहा है। वहीं ख़ुशी इस बात की भी है कि देश की दो महत्वपूर्ण संस्थाएं लोकसभा और राज्यसभा के अध्यक्ष दोनों इस सदन के सदस्य रह चुके हैं।

जोशी ने पूर्व मुख्यमंत्रियों मोहनलाल सुखाड़िया और भैरों सिंह शेखावत के नाम का ज़िक्र करते हुए कहा कि राज्य में संसदीय परंपराओं का निर्माण हो रहा है। उन्होंने कहा कि अमृत महोत्सव का 75वां वर्ष चल रहा है और दो दिन के इस पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी।

जोशी ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इस देश में संसदीय लोकतंत्र को हमने अपनाया है। संसदीय लोकतंत्र में जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए हम अलग-अलग पार्टियों के लोग जनप्रतिनिधियों के रूप में चुनकर आते हैं। विधानमंडल और लोकसभा में जिनका बहुमत होता है वह नीति बनाकर प्रदेश और देश में नीति निर्माण का काम करते हैं, पर उनकी अकाउंटेबिलिटी निर्धारित करने का काम चुने हुए जनप्रतिनिधि करते हैं। लेकिन अब इसे 75 साल बाद फिर से रिव्यू करने की आवश्यकता है। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश राय सिंह और विपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया ने भी सम्मेलन को सम्बोधित किया।

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