राजधानी का बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (बीआरटीएस) कॉरिडोर शुरू होने के इंतजार में है। सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने और यात्रियों को कम समय में गंतव्य तक पहुंचाने के लिए बनाए इस कॉरिडोर का उपयोग पिछले 13 वर्ष में नहीं हो पाया है। स्थिति यह है कि सीकर रोड, अजमेर रोड और न्यू सांगानेर रोड का कॉरिडोर तो खाली पड़ा रहता है जबकि, इसके दोनों सड़क पर वाहनों का दबाव रहता है। यदि जिम्मेदार महकमे बसों का संचालन इस कॉरिडोर में शुरू करवा दें तो लोगों को जाम से भी छुटकारा मिलेगा और कामकाज के लिए भी समय से पहुंच जाएंगे। अभी तक की बात करें तो लोग कई बार कॉरिडोर में अपना निजी वाहन लेकर चले जाते हैं ऐेसे में उन्हें यातायात पुलिस उनका चालान तक कर देती है।
सामंजस्य की कमी
सीकर रोड, अजमेर रोड और न्यू सांगानेर रोड पर कॉरिडोर के आस-पास सिटी बसों और निजी बसों का संचालन होता है। जिम्मेदार विभाग इन बसों को कॉरिडोर में ले आएं तो बाहरी ट्रैफिक सुगम होगा और यात्रियों को भी जाम से राहत मिलेगी।
यहां कॉरिडोर
सीकर रोड: रोड नम्बर 14 से अम्बाबाड़ी तक
अजमेर रोड: डीसीएम से 200 फीट चौराहे तक
न्यू सांगानेर रोड: 200 फीट चौराहे से बी टू बाइपास तिराहे तक
कौन क्या करे
-जेडीए: क्षतिग्रस्त हिस्से को सही करे और बस स्टॉपेज को व्यवस्थित कर दे।
-यातायात पुलिस: कॉरिडोर में निजी वाहनों का प्रवेश रोके।
-जेसीटीएसएल: सिटी बसों का संचालन करे।
बदहाली का आलम ये
-बस स्टॉपेज का बुरा हाल, कुर्सियां तक टूट गई हैं।
-कॉरिडोर की जालियां भी टूट गईं हैं। इनसे लोग मुख्य कॉरिडोर से दूसरी ओर जाते हैं।
फैक्ट फाइल
-515 करोड़ खर्च हुए हैं कॉरिडोर पर राजधानी में
-16 किमी तक फैला है बीआरटीएस का दायरा
-246 करोड़ खर्च हुए आचार्य तुलसी मार्ग (अजमेर रोड एलिवेटेड) पर, ये भी है कॉरिडोर का हिस्सा
ऐसे की जाए शुरुआत
-जयपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड (जेसीटीएसएल) कॉरिडोर के लिए करीब 40 बसों का संचालन करे।
-निजी बसों को भी कॉरिडोर में चलाया जा सकता है। आस-पास के लोगों को जागरूक किया जाए ताकि कॉरिडोर में बने बस स्टॉपेज पर यात्री पहुंच सकें।
कभी उपयोगी बनाओ तो कभी हटाओ
-अक्टूबर, 2017 में तत्कालीन नगरीय विकास मंत्री श्रीचंद कृपलानी ने कॉरिडोर को लेकर बैठक की। अधिकारियों को इसे उपयोगी बनाने के निर्देश भी दिए थे।
-अगस्त, 2020 में तत्कालीन परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने राज्य सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक में कॉरिडोर को हटाने के लिए कहा था।
आइआइटी, दिल्ली ने भी एक रिपोर्ट में माना है कि टियर-2 सिटी के लिए बीआरटीएस कॉरिडोर सार्वजनिक परिवहन के लिए बेहतर विकल्प है। कॉरिडोर बनाने में प्रति किलोमीटर 25-30 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। मौजूदा कॉरिडोर का उपयोग किया जा सकता है। राज्य सरकार ने लेखानुदान में नई बसों की घोषणा की है। इन बसों को कॉरिडोर में चलाया जा सकता है। इससे कॉरिडोर के दोनों ओर चलने वाले वाहनों की आवाजाही आसानी से हो सकेगी। अभी सिटी बसें और निजी बसों के रुकने से बसें सुगम यातायात में अवरोध पैदा करती हैं।
-एनसी माथुर, सेवानिवृत्त निदेशक, अभियांत्रिकी शाखा, जेडीए