
आरयू: दुर्घटना के समय मौत पर केवल 10 रुपए के निवेश पर 10 लाख तक का बीमा
राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्रों की दुर्घटना के समय मौत हो जाने पर उनके परिजनों को सहायता देने के उद्देश्य से 2005 में दुर्घटना बीमा योजना की शुरूआत की गई थी। राजस्थान विश्वविद्यालय के पीआरओ डॉ भूपेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि योजना के तहत दुर्घटना के समय मौत पर 10 लाख तक की सहायता ले सकतेें हैं। वहीं दुर्घटना में घायल होने पर भी पीड़ित छात्र 1 लाख तक की मेडिकल सहायता ले सकता हैं। इस योजना के लाभ के लिए प्रवेश के समय ही छात्र से 100 रुपए लिए जातें हैं।
उन्होंने बताया कि 2005 में राजस्थान पत्रिका के प्रकाशित दुर्घटना सर्वे में बताया गया था कि राज्य में 3 साल के दौरान दुर्घटना में करीब 21 हजार मौतें हुई जिसमें से 7 हजार मौतें 19 से 23 साल के यूवकों की हुई। सर्वे के आधार पर पीआरओ आॅफिस ने विश्वविद्यालय के समक्ष यह प्लान रखा था। उन्होंने बताया कि दुर्घटना बीमा योजना का लाभ अबतक 63 छात्रों को मिल चुका है।
उन्होंने बताया कि पीआरओ आॅफिस ने 2005 में छात्रों को दुर्घटना के समय मौत होने या दुर्घटना में घायल होने वाले छात्रों की सहायता देने के उद्देश्य से बनाया गया था, जिसके तहत अगर विश्वविद्यालय का कोई भी छात्र की दुर्घटना के समय मौत हो जाने पर पीड़ित का नोमीनी 1 लाख तक की सहायता क्लेम कर सकता था। पीड़ित अगर अस्पताल में भर्ती है तो उसे मेडिकल ट्रीटमेंट के तौर पर इलाज का कुछ पैसा प्रदान किया जाता था। योजना के तहत हर छात्र से मात्र 100 रुपए एडमिशन के समय लिए जाते हैं। जिसके बाद उन्हें साल भर तक का मेडिकल की सहायता दी जाती है। लेकिन अब 2023 में विश्वविद्यालय के किसी छात्र की दुर्घटना के समय मौत हो जाती है तो उसका नोमीनी 10 लाख तक की सहायता क्लेम कर सकता है। यहीं नहीं अगर पीड़ित दुर्घटना में घायल होता है और 24 घंटे तक किसी अस्पताल में उपचार करवाता है तो उसे 1 लाख तक की मेडिकल सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत अबतक 1.5 करोड़ तक की राशी छात्रों को प्रदान की गई है।
उन्होंने बताया कि उनकी पहल पर राजस्थान विश्वविद्यालय में लागू हुई छात्र दुर्घटना बीमा की पहली सहायता विश्वविद्यालय के पढ़ने वाले एक छात्र की विधवा मां को दी गई थी। विश्वविद्यालय में पढ़ने वाला यह छात्र इस विधवा मां का इकलौता पुत्र था। कॉलेज से घर लौटते समय घर के नजदीक जीप से टक्कर लग कर उसकी मृत्यु हो गई थी । विधवा मां के निर्धन अवस्था में होने के कारण उसने अपने पुत्र के अंतिम क्रियाओं के लिए 50 हजार रुपए का कर्जा लिया। राजस्थान विश्वविद्यालय की ओर से उस छात्र की माता को 1 लाख रुपए की पहली सहायता प्रदान की गई। उन्होंने बताया कि कुलपति से चेक लेते समय वह विधवा महिला भावुक हो गई थी।
Updated on:
10 May 2023 06:13 pm
Published on:
09 May 2023 06:07 pm
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