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Medaram Jatara: छत्तीसगढ़ में 21 फरवरी से शुरू हो रहा आदिवासियों का महाकुंभ, एक करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं का लगेगा जमावड़ा

Medaram Jatara: विश्व प्रसिद्ध आदिवासी जातरा तीन दिवसीय मेडारम मेला 21 फरवरी को प्रारंभ होने वाली हैं। कुंभ की तर्ज पर इस मेले में एक करोड़ से अधिक आदिवासी श्रद्धालु जमा होंगे।

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Medaram Jatara: आपको बता दें कि मेले के लिए नदी तट के आस-पास दस किमी के दायरे में अस्थाई गांव बनाने का काम प्रशासन पूरा कर लिया हैं। इस इलाके में जम्पन्नावांगू नदी को पवित्र नदी माना जाता हैं, इसके तट पर समक्का व सारलम्मा माता की पूजा अर्चना व इन्हे गुड का भोग चढ़ाने दूर दराज से लोग यहां पहुंचेंगे।

Medaram Jatara

Medaram Jatara: मां समक्का चिलकलगुठ्ठा से मेडारम मंदिर में और मां सारलम्मा का कोनेपल्ली से मेडारम का प्रस्थान 21 फरवरी को होगा, गुड, साड़ी, चूड़ी, हल्दी, कुंकुम दोनों माताओं को चढ़ाया जाएगा। माताओं को इसके अलावा बकरा व मुर्गा की बलि चढ़ाई जाती हैं।

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Medaram Jatara: जातरा के लिए तेलंगाना सरकार ने एक सौ दस करोड़ बजट आवंटन किया हैं। वहीं मुलुगु की स्थानीय विधायक व कैबिनेट मंत्री सीतक्का मेडारम में रहकर लगातार तैयारियां कर रही हैं। मेले के शुरू होते ही तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी व पूरा कैबिनेट एवं महाराष्ट्र,आंध्र व छत्तीसगढ़ के मंत्री शिरकत होंगे।

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Medaram Jatara: मान्यता के अनुसार मां समक्का व सारलम्मा माता को गुड का चढ़ावा दिया जाता हैं, इसके चलते कई लाखों टन गुड यहां प्रसाद के तौर पर चढ़ावा चढ़ता हैं, गुड को सोने का प्रतिरूप माना जाता हैं।

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Medaram Jatara: कोंटा से भद्राचलम होते हुए तेलंगाना के मनगूर होते मेडारम जाया जा सकता हैं। यह दूरी 210 किमी हैं। इसके अलावा बीजापुर से तारलागुड़ा, वेटूरनागारम सें मेडारम जा सकते हैं, यह दूरी बीजापुर से 156 किमी हैं। दोनों ही सड़क मार्ग बेहतर हैं।