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टीओटी ने अटकाए सेना के वाहन

वीएफजे में नहीं हो रहा उत्पादन, रक्षा मंत्रालय और कम्पनियों के बीच पुन: होना है अनुबंध  

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LPTA and Stallion military vehicles,

jabalpur. Production of major army vehicles is affected at the Vehicle Factory Jabalpur (VFJ). This situation persists due to non-renewal of Transfer of Technology (TOT) from the Ministry of Defense.

जबलपुर. वीकल फैक्ट्री जबलपुर (वीएफजे) में सेना के प्रमुख वाहनों का उत्पादन प्रभावित है। रक्षा मंत्रालय से ट्रांसफर ऑफ टेक्नालॉजी (टीओटी) का नवीनीकरण नहीं होने से यह स्थिति बनी हुई है। ऐसे में फैक्ट्री प्रबंधन और कर्मचारियों की चिंता बढ़ गई है। टीओटी के कारण इन वाहनों के लिए कलपुर्जों के टेंडर नहीं हो पा रहे हैं। आयुध निर्माणी बोर्ड (ओएफबी) के माध्यम से रक्षा मंत्रालय से इस सम्बंध में पत्र व्यवहार चल रहा है।

ओएफबी ने वीएफजे को एलपीटीए और स्टालियन सैन्य वाहनों का इंडेंट यानि वर्क का ऑर्डर तो दिया था, लेकिन टीओटी पिछले साल समाप्त हो गई थी। इसके लिए टाटा और अशोक लीलैंड से टीओटी का विस्तार कराया जाना था। रक्षा मंत्रालय और इन कम्पनियों के बीच पुन: अनुबंध होना है।

क्या है ट्रांसफर ऑफ टेक्नालॉजी

टीओटी दरअसल दो संस्थाओं के बीच तकनीक का अनुबंध है। किसी संस्था की पेटेंट कराई हुई तकनीक का इस्तेमाल करने के लिए उससे अनुबंध करना पड़ता है। रक्षा मंत्रालय ने वीकल फैक्ट्री के एलपीटीए वाहन के लिए टाटा ऑटोमोबाइल से, स्टालियन वाहन के लिए अशोक लीलैंंड से टीओटी कर रखी है। आमतौर पर सात-सात साल के बीच में इसका नवीनीकरण होता रहा है। इन दोनों वाहनों की टीओटी पिछले साल अगस्त व सितम्बर में समाप्त हो चुकी है।

कई विभाग लगाते हैं आपत्ति

टीओटी के बिना डिफेंस प्रोक्योरमेंट की प्रक्रिया पूरी करने पर कई विभाग आपत्ति लगाते हैं। खासकर एकाउंट सेक्शन किसी भी प्रकार के कलपुर्जे की खरीदी के लिए टेंडर के दौरान ऐसा करता है।

22 सौ से ज्यादा वाहनों का इंडेंट

वीएफजे को सेना के माध्यम से आयुध निर्माणी बोर्ड से करीब 22 सौ वाहनों का इंडेंट मिला है। सूत्रों के अनुसार इसमें 15 सौ के करीब स्टालियन और लगभग 700 एलपीटीए वाहन शामिल हैं।

सैन्य वाहनों के लिए टीओटी लेने के प्रयास उच्च स्तर पर चल रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द ही यह प्राप्त हो जाएगी।
एके राय, जनसम्पर्क अधिकारी वीएफजे

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