
डैम से प्रचंड वेग से निकलती जलधारा से चार-पांच फीट ऊंची लहरें उठ रही थीं। शाम चार बजे बरगी डैम के पास का दृय मेले जैसा हो गया।

महापौर स्वाति गोडबोले ने बताया कि वर्ष 1996 में बरगी डैम के सभी गेट खुलने का दृश्य उन्हें आज भी याद है। रविवार को डैम के सभी गेट खुलने की सूचना मिली तो वे खुद को यहां आने से रोक नहीं सकीं। जिलहरी घाट नित्य तैराकी मंडल के अधिवक्ता संतोष गंगवार, राजू गांधी तैराकों के साथ पहुंचे। वेटरनरी डॉ. केपी सिंह, शहर के शरद काबरा सहित बड़ी संख्या में लोग सपरिवार बरगी डैम पहुंचे।

शाम चार बजे बरगी डैम के पास का दृय मेले जैसा हो गया। लोगों ने परिवार और दोस्तों के साथ सेल्फी ली। बारिश थमी तो मौसम सुहाना हो गया।

लॉन्ग ड्राइव कर बरगी डैम पहुंचने वाले लोग वापसी के दौरान सड़कों पर रुककर फोटोग्राफी करते नजर आए।

लोगों ने परिवार और दोस्तों के साथ सेल्फी ली।

डैम के गेट से प्रचंड वेग से निकलती जलधारा और उससे धुआंधार की तरह बनने वाले अद्भुत दृश्य लोग एकटक देखते रह गए।

भेड़ाघाट में संगमरमरी वादियों के बीच उफनती नर्मदा के विहंगम दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। ऐसी ही स्थिति तिलवाराघाट के पुराने पुल की थी। ग्वारीघाट में भी लोग बच्चों और दोस्तों के साथ पहुंचे। दद्दा दरबार, जिलहरी घाट, और साकेतधाम की ओर से भी बड़ी सख्या में लोग मां नर्मदा का बदला हुआ स्वरूप देखते नजर आए।