
शोभा ओझा
जबलपुर। मप्र हाइकोर्ट ने महिला आयोग के अध्यक्ष पद पर फिलहाल नई नियुक्तिनहीं करने का निर्देश दिया। अपेक्स बैंक के प्रशासक पद से हटाए गए अशोक सिंह को राहत प्रदान की। जबकि, राज्य सरकार से पूछा कि जबलपुर जिला सहकारी बैंक के निवर्तमान अध्यक्ष पूर्व विधायक नीलेश अवस्थी को बिना कारण हटा कर उनकी जगह रजिस्ट्रार को इस पद का जिम्मा क्यों दिया गया? इन तीन मामलों ने मप्र की राजनीति में फिर से नई बहस तेज हो गई है। प्रदेश में कांग्रेस सरकार ने उक्त तीनों नियुक्तियों को विधि सम्मत तरीके से करने का दावा किया था। लेकिन, सरकार बदली तो प्रदेश की रीति-नीति भी बदली। भाजपा सरकार ने इन पदों पर अपने हिसाब से कैंची चलाई। स्वाभाविक तौर पर मामला राजनीतिक था। इसलिए दोनों राजनीतिक दलों ने अपने हिसाब से बयान दिए। जवाब में भी तर्क रखे गए। कांग्रेस ने कहा भाजपा ने राजनीतिक दुश्मनी निकाली। भाजपा ने कहा कि इस तरह की नियुक्तियां हमेशा से सरकारें अपने हिसाब से ही करती हैं।
बताया था असंवैधानिक
शोभा ओझा ने याचिका दायर कर मािहला आयोग के अध्यक्ष पद से उनकी नियुक्तिनिरस्त किए जाने के फैसले को कठघरे मे रखा था। याचिका के माध्यम से उनकी नियुक्ति को निरस्त करने की प्रक्रिया को असंवैधानिक बताते हुए निरस्त करने की मांग की गई। उनका कहना था कि किसी भी प्रक्रिया का पालन किए बगैर संवैधानिक पद पर हुई नियुक्तियों को निरस्त किया गया।
राजनीतिक दुर्भावना
अपेक्स बैंक के प्रशासक रहे अशोक सिंह की ओर से तर्क दिया कि अपेक्स बैंक, भोपाल के प्रशासक पद पर नियुक्तिजुलाई 2019 में हुई थी। आगे चलकर कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दिया गया। लेकिन, जैसे ही नई सरकार अस्तित्व में आई, 25 मार्च 2020 को याचिकाकर्ता को हटा दिया गया। कार्रवाई राजनीतिक दुर्भावनावश की गई।
मनमानी कार्रवाई का आरोप
जबलपुर जिला सहकारी बैंक के निवर्तमान अध्यक्ष पूर्व विधायक नीलेश अवस्थी ने याचिका के माध्यम से कहा कि नई सरकार ने 25 मार्च 2020 को आदेश जारी कर उक्तपद से हटाने का आदेश जारी कर दिया। साथ ही उक्त पद पर रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां को प्रशासक नियुक्तकर दिया। इस कार्रवाई को मनमानी और असंवैधानिक बताते हुए निरस्त करने का आग्रह किया।
Published on:
23 May 2020 11:12 pm
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