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गुठलियों वाली मैडम: लोगों के लिए जूठन, डॉ. भारती के लिए भविष्य की ऑक्सीजन

नर्मदापुरम (होशंगाबाद) की शासकीय शिक्षिका की अनूठी पहल, खाए हुए फलों के बीजों को करती हैं एकत्रित बनाती हैं पौधे

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amazing teacher of narmadapuram

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लाली कोष्टा@जबलपुर। पर्यावरण संरक्षण पर लोग चर्चाएं तो बहुत करते हैं, लेकिन ऐसे बहुत ही विरले लोग होते हैं जो इस पर अमल करते हुए संरक्षण का सटीक उदाहरण पेश कर पाते हैं। उनमें से एक हैं नर्मदापुरम (होशंगाबाद) की शासकीय शिक्षिका डॉ. भारती मिश्रा। जो हम आपके के द्वारा फेंके गए फलों व सब्जियों के बीजों बिना किसी शर्म के एकत्रित करती हैं, बल्कि उनमें नव जीवन की कोपलों को संजोते हुए पेड़ बनाने का मार्ग भी प्रशस्त करती हैं। वे कहती हैं कि हमारा छोटा सा प्रयास भविष्य के लिए फल, फूल तो देगा ही साथ में ऑक्सीजन भी मुफ्त में मिलेगी।

ऐसे की शुरुआत
डॉ. भारती मिश्रा बताती हैं कि मुझे इस कार्य की प्रेरणा मेरे पति राजेंद्र मिश्र से मिली। वर्ष 2012 के पूर्व हमारे शाहपुर बैतूल स्थित फार्म हाउस पर परंपरागत खेती हो रही थी। वहीं देश दुनिया में वृक्षों की हो रही अंधाधुंध कटाई से पर्यावरण को नुकसान को देखते हुए पति ने अपने फार्म हाउस व घर के बगीचों में फलदार व छायादार वृक्ष लगाने का निर्णय किया। मुझे भी इस कार्य में सहयोग देने का आग्रह किया। साल 2012, 13 एवं 14 में मैंने उनके साथ बगीचे व फार्म हाउस के लिए पौधे तैयार किए तथा फार्म हाउस में 300 से अधिक पौधे व घर के बगीचे में भी लगाए। इनमें आम, आंवला, नींबू, पपीता,नीम, मीठी नीम आदि शामिल थे।

ज्यादा पौधे हुए तो बांट दिए
जब मेरे पास जगह नहीं बची तो आवश्यकता से अधिक पौधे होने पर करीब डेढ़ सौ पौधे अपने मित्रों परिजनों को दान किया और उन्हें पेड़ बनाने का के लिए प्रेरित किया। इस दौरान मुझे महसूस हुआ यह काम मुझे बहुत सुकून देता है और थकने नहीं देता। मेरे परिजनों व मित्रों ने इसकी सराहना भी की। फिर मैंने अपनी क्षमता के अनुरूप को वृहद स्तर पर बढ़ाने के लिए स्वयं को प्रेरित किया। मैंने अपना अधिक से अधिक समय इस कार्य को समर्पित करने का फैसला लिया। स्कूल में अध्यापन कार्य के लिए जाने से पूर्व एवं स्कूल से लौटकर गृह कार्य से समय निकालकर नियमित रूप से पौधे तैयार करती हूं और तथा पौधे तैयार होने के बाद उनका निशुल्क वितरण कार्य साल भर चलता रहता है।

मांग लेती हूं फेंकी हुई गुठलियां
डॉ. भारती ने बताया मैं कहीं भी जाती हूं चाहे स्कूल हो, घर हो या नाते रिश्तेदार या बाजार वहां कोई कुछ फल खा रहा है, जिसके गुठलियां या बीज फेंके जाते हैं तो मैं उनसे बेझिझक होकर मांग लेती हूं। लोगों को आश्चर्य जरूर होता है, लेकिन मुझे इसमें कोई आश्चर्य नहीं होता। मैं उन्हें बता देती हूं कि आपकी यह व्यर्थ की गुठली एक बड़े पौधे को जन्म दे सकती है। लोग मुझे फलों व सब्जियों की जो गुठलियां होती हैं वह दे देते हैं। गुठलियों को विधि अनुसार रोपित किया जाता है और इनके पौधे तैयार किए जाते हैं। इन्हें लगाने के लिए मैं फेंके हुए दूध के पैकेट का उपयोग करती हूं। जो मैं स्वयं यहां वहां से एकत्रित कर लेती हूं। मेरा उद्देश्य है जो आपके लिए व्यर्थ है वह भविष्य के लिए जरूरत है।

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