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हमारी आत्मा राजस्थान की माटी से गहराई से जुड़ी हुई, इसका गौरवशाली अतीत और उज्ज्वल भविष्य हमारे लिए गर्व की बात

हमारी आत्मा राजस्थान की माटी से गहराई से जुड़ी हुई है और इसका गौरवशाली अतीत और उज्ज्वल भविष्य हमारे लिए गर्व की बात है। यह भूमि हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़े रखने की प्रेरणा देती है और हमें अपनी जड़ों को कभी न भूलने का संदेश देती है। राजस्थान सिर्फ एक राज्य नहीं, बल्कि भावनाओं का संगम है। यहां की माटी की खुशबू, लोककला, संस्कृति और परंपराएं इसे विशेष बनाती हैं।

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गदग में आयोजित भाषण प्रतियोगिता में निर्णायक के साथ प्रतियोगिता की विजेता प्रतिभागी।

गदग में आयोजित भाषण प्रतियोगिता में निर्णायक के साथ प्रतियोगिता की विजेता प्रतिभागी।

घर पर राजस्थानी में बात
भाषण प्रतियोगिता का विषय था सबसूं प्यारो, सबसूं न्यारो, म्हारो राजस्थान। राजस्थान पत्रिका हुब्बल्ली संस्करण के बीसवें स्थापना दिवस एवं राजस्थान दिवस के अवसर पर गदग (कर्नाटक) में आयोजित भाषण प्रतियोगिता में भाग ले रही महिलाओं ने राजस्थान की कला एवं संस्कृति, रहन-सहन, पर्व-त्योहार, पहनावा, खान-पान समेत राजस्थान की अन्य जानकारी के बारे में राजस्थानी भाषा में प्रकाश डाला। राजस्थानी में बिना अटके महिलाओं ने अपनी बात प्रभावी ढंग से रखी और जता दिया कि वे आज भी राजस्थान की माटी से जुड़ी हुई है और अपनी मातृभाषा से उन्हें बहुत लगाव भी है। महिलाओं ने प्रतियोगिता के दौरान कहा कि वे घर पर अपनी मातृ भाषा राजस्थानी में ही बात करती है।

राजस्थान की धरती वीरों की भूमि
प्रतियोगिता में भाग ले रही महिलाओं ने कहा, राजस्थान की धरती वीरों की भूमि रही है। महाराणा प्रताप, पृथ्वीराज चौहान और राणा सांगा जैसे वीर योद्धाओं ने इस भूमि को गौरवान्वित किया है। यहां के किले और महल इसकी ऐतिहासिक विरासत को दर्शाते हैं। युद्ध और बलिदान की कहानियां आज भी राजस्थान की हवाओं में गूंजती हैं।

दाल, बाटी, चूरमा
महिलाओं ने अपने भाषण में कहा कि राजस्थानी भोजन अपने स्वाद और विशेष व्यंजनों के लिए प्रसिद्ध है। दाल-बाटी-चूरमा, गट्टे की सब्जी, केर-सांगरी, मिर्ची बड़ा और प्याज कचौरी यहां के प्रसिद्ध व्यंजनों में शुमार हैं। ये व्यंजन राजस्थान की समृद्ध खान-पान परंपरा को दर्शाते हैं।

कुचेरा की इंदिरा बाघमार को मिला पहला स्थान
कुचेरा की इंदिरा बाघमार ने प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल किया। समदड़ी की बन्टी पालरेचा दूसरे एवं समदड़ी की ममता पालरेचा तीसरे स्थान पर रही। कुचेरा की सपना बाघमार को प्रोत्साहन पुरस्कार दिया गया। नीकिता राजपुरोहित प्रतियोगिता की निर्णायक थीं। प्रारम्भ में राजस्थान पत्रिका हुब्बल्ली के संपादकीय प्रभारी अशोक सिंह राजपुरोहित ने पत्रिका के सामाजिक सरोकार एवं प्रतियोगिता के बारे में जानकारी दी।

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