बहुत से लोग गाठिया या जोड़ों के दर्द से ग्रस्त रहते हैं। ऐसे में रतनजोत (benefits of Ratanjot) का उपयोग उनके लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकता है, क्योंकि इसमें एंटी-बायोटिक और एंटी-इंफ्लेमेट्री गुण होते हैं
benefits of Ratanjot : रतनजोत में एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल और एंटीऑक्सीडेंट गुण विद्यमान हैं। इसके फल, पत्ते और जड़ें स्वास्थ्य के लिए उपयोगी माने जाते हैं। इसके अलावा, इसमें नेफ्थोक्विनोन, फ्लेवोनोइड्स, अल्केनिन और शिकोनिन जैसे महत्वपूर्ण रसायन भी होते हैं। रतनजोत का उपयोग करने से त्वचा, बाल, अनिद्रा और तनाव जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है। इसके साथ ही, यह आपकी इम्युनिटी को भी मजबूत बनाता है। रतनजोत को अल्कानेट के नाम से भी जाना जाता है।
गठिया में फायदेमंद
बहुत से लोग गाठिया या जोड़ों के दर्द से ग्रस्त रहते हैं। ऐसे में रतनजोत का उपयोग उनके लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकता है, क्योंकि इसमें एंटी-बायोटिक और एंटी-इंफ्लेमेट्री गुण होते हैं, जो जोड़ों के दर्द और सूजन को कम करने में मदद करते हैं। इसके लिए आप रतनजोत के पत्तों का प्रयोग कर सकते हैं।
बालों के लिए फायदेमंद
रतनजोत (benefits of Ratanjot) का उपयोग करने से आपके बालों में प्राकृतिक चमक बनी रहती है। रतनजोत का तेल लगाने से बाल घने और लंबे हो जाते हैं। इससे बालों का टूटना और झड़ना कम होता है, साथ ही रूखापन भी समाप्त हो जाता है।
अनिद्रा और डिप्रेशन में फायदेमंद
रतनजोत (benefits of Ratanjot) का उपयोग अनिद्रा और डिप्रेशन जैसी समस्याओं से बचने के लिए किया जा सकता है। इसके लिए, आप रतनजोत के तेल में कुछ बूंदें नारियल तेल की मिलाकर इसे अपने माथे पर लगा सकते हैं या इसकी सुगंध ले सकते हैं। इससे सिरदर्द में भी राहत मिलेगी।
बुखार ठीक करने में कारगर
रतनजोत की जड़ के तेल का उपयोग बुखार को ठीक करने के लिए किया जाता है, क्योंकि यह शरीर के तापमान को संतुलित करने में सहायक होता है। रतनजोत के तेल से प्रभावी मालिश करने पर बुखार और शरीर के दर्द में काफी राहत मिलती है।
घाव के उपचार में फायदेमंद
रतनजोत (benefits of Ratanjot) का प्रयोग नसों, घावों, खुजली और चकत्तों के इलाज के लिए किया जाता है। रतनजोत के पत्तों को पीसकर उसमें हल्दी मिलाकर घाव पर लगाना लाभकारी होता है।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।