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अमृत के समान के है पंचगव्य, इन गुणों से रखता है सौ साल जवान

इसमें मौजूद अर्क से तैयार क्रीम एक्जिमा, एलर्जी जैसे त्वचा रोगों में प्रयोग होती है। जानिए इसके बेजोड़ फायदे...

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Sangeeta Chaturvedi

Mar 01, 2016


इसमें मौजूद अर्क से तैयार क्रीम एक्जिमा, एलर्जी जैसे त्वचा रोगों में प्रयोग होती है। जानिए इसके बेजोड़ फायदे...


आयुर्वेद में रोगों से मुक्ति के लिए पंचगव्य को औषधि के रूप में प्रयोग करते हैं। पंचगव्य देसी गाय से प्राप्त पांच चीजों का समूह है। इसमें गोदुग्ध (दूध), गोदधी (दही-छाछ), गोमेह (गोबर), गोघृत (घी) व गोमूत्र (मूत्र) शामिल हैं। सेहतमंद रहने के लिए पांचों को अलग-अलग और समूह, दोनों रूप में इस्तेमाल करते हैं। जानते हैं इसके बारे में-


गोदुग्ध (दूध)

इस दूध में कैल्शियम, विटामिन बी-12, आयोडीन, पोटेशियम जैसे तत्त्व होते हैं। यह इम्युनिटी बढ़ाकर कोशिकाओं को ऊर्जा देता है। दिमाग, हड्डी और मांसपेशियों को मजबूत करता है। जिन्हें इस दूध से एलर्जी/अपच की समस्या हो वे न पिएं। दिन में दो बार एक गिलास की मात्रा में पी सकते हैं।




गोमेह (गोबर)

गोबर के कंडों को जलाने से वातावरण शुद्ध होता है। साथ ही इसमें मौजूद अर्क से तैयार क्रीम एक्जिमा, एलर्जी जैसे त्वचा रोगों में प्रयोग होती है। यह एंटीसेप्टिक, एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल व विटामिन-बी12 के गुणों से भरपूर होता है।


गोमूत्र (मूत्र)

95 प्रतिशत पानी, 2.5 प्रतिशत यूरिया, मिनरल्स, एंजाइम्स, पोटेशियम, विटामिन्स और सोडियम सभी 2.5त्न की मात्रा में होते हैं। हृदय रोग, कैंसर, टीबी, पीलिया, मिर्गी व हिस्टीरिया आदि रोगों में विशेषज्ञ की सलाह से लेने पर यह लाभकारी है। एक बार में इसकी दो चम्मच की मात्रा ली जा सकती है।





गोदधी (दही)

इसमें कैल्शियम, विटामिंस, प्रोटीन, मिनरल्स होते हैं। यह बच्चों व बड़ों में पाचनक्रिया को मजबूत करने और भूख बढ़ाने का काम करता है।




गोघृत (घी)

इसमें कैल्शियम, विटामिन-ए, डी व ई पाए जाते हैं। यह दिमाग व शारीरिक विकास के लिए फायदेमंद है। इससे आंखों की रोशनी दुरुस्त रहती है और मिर्गी, लकवा, कमजोरी, जोड़ों के दर्द, आर्थराइटिस व याददाश्त में सुधार होता है। भोजन में इसके प्रयोग के अलावा इसे आधार बनाकर औषधियां भी तैयार की जाती हैं।


- डॉ. नीरू पारीक, आयुर्वेद विशेषज्ञ

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