
illegal colony
Gwalior news: शहर में सरकारी जमीनों की बंदरबांट का सिलसिला नहीं थम रहा है। अब नया मामला नीडम पुल की जमीन का सामने आया है। यहां की 10 बीघा बेशकीमती जमीन को सिविल न्यायालय से हारने के बाद सरकार अपील में गई थी। लेकिन ताज्जुब इस बात का है कि अपील करने के बाद 22 साल तक शासन ने इस मामले को भुला दिया।
जब शासकीय जमीनों के प्रकरण में शासन की लापरवाही का खुलासा हुआ तब फाइलों को पलटा गया। इसमें नीडम पुल की इस जमीन का मामला भी निकलकर सामने आया।
फिलहाल प्रकरण अंतिम तर्क पर चल रही थी। इस जमीन का रिकॉर्ड शासन ने न्यायालय में पेश किया है। शासन का तर्क है कि प्रतिवादी ने सरकारी जमीन को हड़पने का षडयंत्र रचा है। अवैध कॉलोनी विकसित कर यहां 100 प्लॉट भी बेच डाले। जमीन पर नीडम के पास रेलवे ओवर ब्रिज (नीडम पुल) बन रहा है। रेलवे को भी इसमें पार्टी नहीं बनाया। पूरा दावा तथ्य छिपाकर पेश किया। जमीन पीडब्ल्यूडी के नाम है। अब इसमें 11 जुलाई को बहस होगी।
अनिल राघव, तहसीलदार सिटी सेंटर का कहना है कि अपील पूर्व से लंबित थी। जमीन शासकीय है। इसका रिकॉर्ड न्यायालय में पेश कर दिया है। कितनी जमीन पर कॉलोनी काटकर प्लॉट बेच दिए हैं। इसकी हम जांच करा रहे हैं।
दरअसल शांतिनाथ ने 1997 में सर्वे क्रमांक 981 से 989 तक की 10 बीघा भूमि पर दावा किया था। इनके पक्ष में जमीन की डिक्री हो गई। डिक्री के खिलाफ 2002 में शासन ने अपील की। जमीन पर अपील के बाद शासन भूल गया। न दस्तावेज पेश किए और न अधिवक्ता उपस्थित हुए। जब शासन जमीन हार गया तो मामला सुप्रीम कोर्ट गया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अपील 2023 में फिर से अपील री स्टोर हुई। शासन ने अपना रिकॉर्ड पेश किया है। गया था।
Updated on:
09 Jul 2024 03:36 pm
Published on:
09 Jul 2024 03:28 pm
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