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हुनर से ओडिशा की आदिवासी महिलाओं ने बनाया मुकाम, देशभर में हैं इनकी बनाई टसर सिल्क साड़ियों की डिमांड

Odisha Tribal ladies :राज्य सरकार की मदद से आदिवासी महिलाएं टसर सिल्क के प्रोडक्ट्स बनाने का करती हैं काम बड़े ऑनलाइन वेबसाइट्स में भी बिकती हैं इनकी साड़ियां

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Odisha Tribal ladies

नई दिल्ली। कहते हैं अगर व्यक्ति हुनरमंद हो तो वो घर बैठे भी लाखों की कमाई कर सकता है। इसी कहावत को सच कर दिखाया है ओडिशा की आदिवासी महिलाओं (Tribal ladies) के समूह ने। वो अपने हुनर से बड़े-बड़े उद्योगपतियों को भी कमाई में मात देती हैं। इनकी डिजाइन की गई टसर सिल्क साड़ियों ( tussar silk sarees) की डिमांड देशभर में हैं। इसे कई नामचीन ऑनलाइन वेबसाइट्स से खरीदा जा सकता है। ये महिलाएं सिल्क पार्क में काम करती हैं।

मालूम हो कि कोंझर की महिलाएं पारंपरिक रूप से टसर की खेती करती हैं। मगर उनके इस हुनर को एक मुकाम देने के लिए साल 2017 में राज्य सरकार ने पहल की। इसके तहत टसर को बड़े पैमाने पर प्रमोट किया गया। इसमें वहां की महिलाओं को रोजगार के लिए एक हेक्टेयर जमीन दी गई, जिस पर वो टसर की खेती कर सकें। महिलाओं की मेहनत रंग लाई और कोकून का उत्पादन बढ़ गया। ऐसे में पिछले साल राज्य सरकार ने बागमुंडा टसर सिल्क पार्क की स्थापना की। इसका लक्ष्य टसर की खेती करने वालों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है।

महिलाओं को मिलती है ट्रेनिंग
सिल्क पार्क का हिस्सा बनकर ज्यादा से ज्यादा आदिवासी महिलाएं कमाई कर सकें इसके लिए उन्हें टसर सिल्क से चीजें बनाया सिखाया जाता है। इसके लिए उन्हें ट्रेनिंग दी जाती है। जिसमें महिलाएं रॉ सिल्क से साड़ी, कपड़ा और अन्य प्रोडक्ट्स आदि बनाने की कला सीखती हैं। शुरुआत में यह काम गांव की 10 से 15 महिलाओं ने सीखा था। अब इन्हें देखकर दूसरी महिलाएं भी प्रेरित हुई हैं। वो भी इस मिशन का हिस्सा हैं।

रोजाना करीब 30 मीटर बनाती हैं फैब्रिक
बताया जाता है कि सिल्क पार्क से जुड़ी महिलाएं रोजाना करीब 20 से 30 मीटर टसर फैब्रिक बनाती हैं। इसके लिए लगभग 12 से 15 किलो सिल्क के धागे का इस्तेमाल होता है। साड़ी बुनने के अलावा ये महिलाएं जैकेट्स, कुर्ते, स्टोल्स, धोती, मास्क और हैंडमेड पंखे भी बनाती हैं। अगस्त 2020 से ये साड़ियां ऑनलाइन उपलब्ध हैं। इन्हें 'बीटीएसपी साड़ी' के नाम से खरीदा जा सकता है।

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