प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट तैयार करने में नवोन्वेषी रुख अपनाने और कौशल विकास व पर्यटन पर विशेष ध्यान देने आह्वान किया। वह मंगलवार को अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों के साथ पहली बैठक को संबोधित कर रहे थे। इसका आयोजन नीति आयोग ने किया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट तैयार करने में नवोन्वेषी रुख अपनाने और
कौशल विकास व पर्यटन पर विशेष ध्यान देने आह्वान किया। वह मंगलवार को
अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों के साथ पहली बैठक को संबोधित कर रहे थे। इसका आयोजन
नीति आयोग ने किया था।
'इकोनोमिक पॉलिसी-द रोड अहेड'
'इकोनोमिक पॉलिसी-द रोड अहेड' यानी आर्थिक नीति
: आगे का रास्ता सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की
वास्तविक अर्थव्यवस्था पर बजट का महत्वपूर्ण प्रभाव है और वह चाहते हैं कि इस अधिक
महत्व देने के लिए हर साल परिश्रम किया जाए।
मानसून है निर्णायक
मोदी ने कहा आज की तारीख
तक इस तरह के खर्च का मानसून आने पर ही प्रावधान किया जाता था जो वांछित नहीं है
क्योंकि सरकारी कार्यक्रम मानसून से पहले के उत्पादन के अपेक्षाकृत निष्क्रिय रहते
हैं। यही कारण है जिसकी वजह से
वर्ष 2017-18 का बजट पेश करने समय पहले किया गया है ताकि वित्तीय वर्ष
के शुरू होने के पहले रोड मैप तैयार हो जाएगा।
एक फरवरी को पेश होगा बजट
सरकार ने कहा है कि
भविष्य में बजट एक फरवरी को पेश किए जाएंगे। बजट में जो दो अन्य
प्रमुख परिवर्तन किए गए हैं उनमें रेल बजट को मिला दिया गया है और योजना मद और गैर
योजना मद का खर्च हटा दिया गया है।
नौकरी पर फोकस
नीति आयोग के अध्यक्ष
अरविंद पनगढ़िया ने बात में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि प्रधानमंत्री और
अर्थशास्त्रियों की बैठक एक प्रयोग था जिसमें अर्थशात्रियों ने तीन महत्वपूर्ण
चीजों कृषि, नौकरी और बजट से जुड़े मुद्दों पर अपना प्रजेंटेशन पेश
किया।
तक दोगुना करने के तरीके पर ध्यान
कृषि क्षेत्र में
अर्थशास्त्रियों ने किसानों की आय वर्ष 2022 तक दोगुना करने
के तरीके पर ध्यान केंद्रित किया और उन्हें इसमें शामिल करने के लिए डिजिटल भुगतान
क्रांति का विस्तार करने पर जोर दिया। शिक्षा क्षेत्र के बारे
में अर्थशास्त्रियों ने गुणवत्ता में सुधार की जरूरत पर बल दिया। पर्यटन क्षेत्र
में निवेश बढ़ाने की जरूरत महसूस की गई।
प्रशासनिक सुधार
कौशल विकास, कर व्यवस्था और किराए से जुड़े मुद्दे, डिजिटल
प्रौद्योगिकी, हाउसिंग, बैंकिंग, प्रशासनिक सुधार और भविष्य में विकास के लिए कदम जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। नीति आयोग और वित्त
मंत्रालय के अधिकारियों के अलावा बैठक में भाग लेने वाले अर्थशास्त्रियों ने
विशेषज्ञों में प्रवीण कृष्ण, सुखपाल सिंह, विजय पॉल शर्मा, नीलकंठ मिश्र, सुरजीत भल्ला, पुलक घोष, गोविंद राव, माधव चह्वाण, एन. के. सिंह,
विवेक देहेजिया, प्रेमनाथ सिन्हा, सुमित बोस और टी. एन. निनान शामल थे।