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बदलते मौसम में शरीर को अधिक ऊर्जा की जरूरत, मोटा अनाज ज्यादा फायदेमंद

बारिश के बाद शरद ऋतु का आगमन हो रहा है। आयुर्वेद के अनुसार शरद ऋ तु पित्त के प्रकोप का समय है। यह समय ऋ तुसंधि काल भी है। इसमें शरीर को अधिक मेहनत करनी पड़ती है जिससे इम्युनिटी घट जाती है। बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है। बच्चे-बुजुर्गों में यह परेशानी ज्यादा ही होती है। बचाव के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना होता है।

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जयपुर

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Jyoti Kumar

Sep 20, 2023

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बारिश के बाद शरद ऋतु का आगमन हो रहा है। आयुर्वेद के अनुसार शरद ऋ तु पित्त के प्रकोप का समय है। यह समय ऋ तुसंधि काल भी है। इसमें शरीर को अधिक मेहनत करनी पड़ती है जिससे इम्युनिटी घट जाती है। बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है। बच्चे-बुजुर्गों में यह परेशानी ज्यादा ही होती है। बचाव के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना होता है।

सांस के रोगी भी विशेष ध्यान दें
इम्युनिटी घटने के कारण सांस के रोगियों को भी ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है। ऐसे रोगियों को केवल गुनगुना पानी से नहाना और पानी पीना भी चाहिए। जोड़ों के रोगियों को भी ध्यान रखना चाहिए। योग-प्राणायाम करें।

मोटे अनाज से कम होता है कफ
मोटे अनाज न केवल शरीर का मेटाबोल्जिम ठीक कर वजन नियंत्रित रखते हैं बल्कि कफ के संचय की प्रवृति को भी कम कम करने में मदद करते हैं।

खट्टे फल-हरी सब्जियां खाएं
विटामिन सी युक्त फल मसलन सेब, संतरा, अंगूर, अमरूद, अनार आंवला और नींबू आदि शामिल करें। इनमें एंटी ऑक्सीडेंट तत्त्व मौजूद होते हैं, जो शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मददगार साबित होते हैं।

एक मुठ्ठी मेवा रोज लें
शरीर की गर्मी बढ़े इसके लिए बादाम, काजू, किशमिश, पिस्ता, अखरोट आदि को आहार में शामिल करें। डायबिटीज रोगी बादाम-अखरोट खाएं। सूखे मेवों के अलावा आप मंूगफली, कद्दू, सेम, अलसी और खरबूजे के बीज आदि ले सकते हैं। पानी की मात्रा कम न होने दें।

सेहतमंद रखेंगे ये उपाय
ठंड में लौंग, तुलसी, काली मिर्च और अदरक से बनी चाय का सेवन करें। इससे खांसी, सर्दी, जुकाम में बचाव होगा।
3-5 ग्राम आंवला (चूर्ण ) को शक्कर के साथ मिलाकर लेना पित्त शामक है। इम्युनिटी भी बढ़ती है।
अदरक, दालचीनी, तुलसी पत्र की चाय, हल्दी का दूध, च्यवनप्राश और शहद इस मौसम में लेना चाहिए।
त्रिकटु चूर्ण को गुड़ के साथ गोली बना लें। उस गोली को चूसेें। गले में खरास, खांसी का शमन करती है।
3 ग्राम हरीतकी (हरड़) चूर्ण , शहद, मिश्री या गुड़ के साथ लेना चाहिए।

लंबे समय ऊर्जा देते हैं मोटे अनाज
साबुत अनाज कई प्रकार की बीमारियों से बचाता है। ओट्स, जौ, मक्का जैसे अनाज ठंड के मौसम में गर्म रखने में मदद करते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, सर्दियों में जठराग्नि बढ़ जाती है। इससे शरीर को अधिक ऊर्जा की जरूरत होती है। इस समय लंबे समय तक ऊर्जा की जरूरत होती है। मोटे और साबुत अनाज खाने से काब्र्स का स्तर धीरे-धीरे बढ़ता है। इससे शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा मिलती है।

इन्हें ज्यादा मात्रा में खाएं
इ स मौसम में पित्त को शांत करने के लिए घी और मुधर पदार्थ खाने चाहिए। चावल, मूंग, गेहूं, जौ, उबाला हुआ दूध, दही, मक्खन, घी, मलाई, श्रीखंड आदि फायदेमंद है। सब्जियों में चौलाई, बथुआ, लौकी, तोरई, मेथी, गाजर, पत्ता गोभी, मूली, पालक, सेम की फली आदि खाएं।

कम मात्रा में खाएं
सौंफ, लहसुन, बैंगन, करेला, हींग, उड़द से बने भारी खाद्य पदार्थ नहीं खाने चाहिए। कढ़ी जैसे खट्टे पदार्थ, क्षार द्रव्य, दही और ज्यादा नमक वाले खाद्य पदार्थ अधिक मात्रा में नहीं खाने चाहिए। फ्रिज में रखी ठंडी चीजें, आइसक्रीम, ठंडा बासी भोजन से परहेज करना जरूरी है। जिन्हें पहले से कोई बीमारी है उन्हें डॉक्टर से सलाह भी लेनी चाहिए। दवाइयां भी उसी अनुसार लें।