MP News: मध्यप्रदेश के दमोह जिले में संचालित होने वाले मिशनरी अस्पताल में पकड़े गए फर्जी डॉक्टर मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। वह शिक्षा मंत्री के बेटे के अस्पताल में पहले काम कर चुका है।
MP News: मध्यप्रदेश के दमोह में स्थित मिशनरी अस्पताल में पकड़े गए फर्जी डॉक्टर मामले बड़ा खुलासा हुआ है। जिसमें उसके पास से दो पोस्टग्रेजुएट डिग्रियां फर्जी निकली हैं। आरोपी ने सात राज्यों के नामचीन अस्पतालों में काम किया है। इसके साथ ही वह स्कूल शिक्षाव मंत्री के बेटे के अस्पताल में संचालित किए जाने वाले अस्पताल में काम कर चुका है।
प्रयागराज से गिरफ्तार किया गया फर्जी डॉक्टर नरेंद्र विक्रमादित्य यादव साल 2022 में एमपी आया था। वह स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह के बेटे के द्वारा नरसिंहपुर में संचालित किए जाने वाले लक्ष्मी नारायण मेमोरियल अस्पताल में काम करने लगा। हालांकि, इस अस्पताल के प्रबंधन अंशुल सिंह राजपूत ने बताया कि नौकरी छोड़ने के पहले से भी कम समय तक वहां काम किया।
पुलिस के द्वारा पुष्टि की गई है कि उसकी दो मास्टर्स डिग्रियां फर्जी निकलीं है। इसके अलावा उसके चार विदेश सर्टिफिकेट के दावे को प्रमाणित करने की कोशिश कर रहे हैं। वह लोगों के साथ कई सालों से धोखाधड़ी कर रहा था। उसका हैदराबाद में भर्ती रैकेट चल रहा था। जिसमें उसने बचने के लिए फर्जी पत्नी और बेटा पेश किया। ब्रिटेन के हार्ट स्पेशलिस्ट डॉ एन जॉन कैम का नाम लेकर नरेंद्र यादव की पोल-पट्टी तब खुली जब उसने सात मरीजों का ऑपरेशन कर दिया। जिसके कारण उनकी मौत हो गई।