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सात मौतों के गंभीर मामले पर कलेक्टर की चुप्पी, एक माह बाद एफआइआर हुई दर्ज

मिशन अस्पताल का मामला: देर रात कोतवाली में दर्ज कराया प्रकरण दमोह. मिशन अस्पताल में फर्जी तरीके से नौकरी करने वाले डॉ. नरेंद्र यादव के मामले में फरवरी आखिर में शिकायत हुई थी। इस मामले में कलेक्टर ने गोपनीय ढंग से सीएमएचओ को जांच करने के निर्देश दिए थे। बताया जाता है कि यह जांच […]

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दमोह

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Hamid Khan

Apr 08, 2025

सात मौतों के गंभीर मामले पर कलेक्टर की चुप्पी, एक माह बाद एफआइआर हुई दर्ज

सात मौतों के गंभीर मामले पर कलेक्टर की चुप्पी, एक माह बाद एफआइआर हुई दर्ज

मिशन अस्पताल का मामला: देर रात कोतवाली में दर्ज कराया प्रकरण

दमोह. मिशन अस्पताल में फर्जी तरीके से नौकरी करने वाले डॉ. नरेंद्र यादव के मामले में फरवरी आखिर में शिकायत हुई थी। इस मामले में कलेक्टर ने गोपनीय ढंग से सीएमएचओ को जांच करने के निर्देश दिए थे। बताया जाता है कि यह जांच 7 मार्च को सीएमएचओ डॉ. मुकेश जैन ने कर ली थी और बाकायदा जांच प्रतिवेदन कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर को सौंप दिया था।
यहां हैरानी की बात यह है कि राष्ट्रीय बाल आयोग की टीम के आने से ठीक करीब 12 घंटे पहले सीएमएचओ ने कोतवाली में प्रतिवेदन प्रस्तुत कर आरोपी चिकित्सक के विरुद्ध एफआइआर दर्ज कराने पहुुंचे।

किसके दबाव में जांच दबाकर बैठे थे कलेक्टर
एक महीने पहले भी यह कार्रवाई हो सकती थी। आरोपी को भी तुरंत पकड़ा जा सकता था, लेकिन प्रशासन ने इस मामले में सीएमएचओ को खुला नहीं छोड़ा। दबाव के बाद सीएमएचओ एफआईआर दर्ज कराने की हिम्मत नहीं जुटा सके। कलेक्टर पर दबाव की भी आशंका जताई जा रही है। यही कारण है कि उन्होंने नपे तुले जवाब दिए हैं। इस एफआइआर मामले में भी कलेक्टर और सीएमएचओ जवाब नहीं दे पा रहे हैं।
जांच में यह तथ्य आए थे सामने
सूत्रों की माने तो 7 मार्च को सीएमएचओ डॉ. जैन मिशन अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन यहां पर प्रबंधक ने बताया कि वह बिना बताए नौकरी छोड़कर जा चुके हैं। दस्तावेज जांच करने पर फोटो कॉपी मिलीं। इसमें सुरप स्पेशियलिटी डीएम कॉर्डियोलॉजी की डिग्री विदेश से किए जाना पाया, जिसको टीम सत्यापित नहीं कर पाई। इसके लिए सागर मेडिकल कॉलेज को पत्र लिखा, जहां से जांच करने से मना कर दिया गया। इसके बाद 24 मार्च को जबलपुर मेडिकल कॉलेज को पत्र लिखा, लेकिन यहां से टीम अभी तक जांच करने नहीं आई। एमबीबीएस और पीजी की डिग्री आंध्रप्रदेश की थी, जिसका पंजीयन पहली नजर में संदिग्ध मिला।

एसपी श्रुतकीर्ति सोमवंशी से सवाल जवाब
सवाल: सात मौत नहीं यह हत्याएं हैं, क्या धाराएं बढ़ेंगी ?
जवाब: अभी तक की जांच में तथ्य सामने आए हैं, उस आधार पर कार्रवाई हो रही है।
सवाल: सातों मौतों का पीएम नहीं हुआ ?
जवाब: मेडिकल यूनिवर्सिटी की टीम को रिपोर्ट्स भेजी है, वह इसकी जांच कर रही है। उसी आधार पर मैं कुछ बता पाउंगा।
सवाल: संचालक और प्रबंधक को आरोपी बनाएंगे ?
जवाब: हमने कार्डियोलॉजिस्ट सहित अन्य पर एफआइआर दर्ज की है, जांच में जो दोषी मिलेगा उन पर कार्रवाई की जाएगी।

कलेक्टर और सीएमएचओ ने नहीं दिए जवाब
&कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर और सीएमएचओ डॉ. मुकेश जैन ने सवालों के कोई जवाब नहीं दिए। सीएमएचओ मीडिया को देखकर भाग खड़े हुए। वहीं, कलेक्टर का कहना था कि उन्होंने आयोग के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत कर दिए हैं। टीम की रिपोर्ट के बाद ही कुछ बता पाएंगे।
सात मौतों के गंभीर मामले पर कलेक्टर की चुप्पी, एक माह बाद एफआइआर हुई दर्ज

दमोह. मिशन अस्पताल में फर्जी तरीके से नौकरी करने वाले डॉ. नरेंद्र यादव के मामले में फरवरी आखिर में शिकायत हुई थी। इस मामले में कलेक्टर ने गोपनीय ढंग से सीएमएचओ को जांच करने के निर्देश दिए थे। बताया जाता है कि यह जांच 7 मार्च को सीएमएचओ डॉ. मुकेश जैन ने कर ली थी और बाकायदा जांच प्रतिवेदन कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर को सौंप दिया था।
यहां हैरानी की बात यह है कि राष्ट्रीय बाल आयोग की टीम के आने से ठीक करीब 12 घंटे पहले सीएमएचओ ने कोतवाली में प्रतिवेदन प्रस्तुत कर आरोपी चिकित्सक के विरुद्ध एफआइआर दर्ज कराने पहुुंचे।

किसके दबाव में जांच दबाकर बैठे थे कलेक्टर
एक महीने पहले भी यह कार्रवाई हो सकती थी। आरोपी को भी तुरंत पकड़ा जा सकता था, लेकिन प्रशासन ने इस मामले में सीएमएचओ को खुला नहीं छोड़ा। दबाव के बाद सीएमएचओ एफआईआर दर्ज कराने की हिम्मत नहीं जुटा सके। कलेक्टर पर दबाव की भी आशंका जताई जा रही है। यही कारण है कि उन्होंने नपे तुले जवाब दिए हैं। इस एफआइआर मामले में भी कलेक्टर और सीएमएचओ जवाब नहीं दे पा रहे हैं।
जांच में यह तथ्य आए थे सामने
सूत्रों की माने तो 7 मार्च को सीएमएचओ डॉ. जैन मिशन अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन यहां पर प्रबंधक ने बताया कि वह बिना बताए नौकरी छोड़कर जा चुके हैं। दस्तावेज जांच करने पर फोटो कॉपी मिलीं। इसमें सुरप स्पेशियलिटी डीएम कॉर्डियोलॉजी की डिग्री विदेश से किए जाना पाया, जिसको टीम सत्यापित नहीं कर पाई। इसके लिए सागर मेडिकल कॉलेज को पत्र लिखा, जहां से जांच करने से मना कर दिया गया। इसके बाद 24 मार्च को जबलपुर मेडिकल कॉलेज को पत्र लिखा, लेकिन यहां से टीम अभी तक जांच करने नहीं आई। एमबीबीएस और पीजी की डिग्री आंध्रप्रदेश की थी, जिसका पंजीयन पहली नजर में संदिग्ध मिला।

एसपी श्रुतकीर्ति सोमवंशी से सवाल जवाब
सवाल: सात मौत नहीं यह हत्याएं हैं, क्या धाराएं बढ़ेंगी ?
जवाब: अभी तक की जांच में तथ्य सामने आए हैं, उस आधार पर कार्रवाई हो रही है।
सवाल: सातों मौतों का पीएम नहीं हुआ ?
जवाब: मेडिकल यूनिवर्सिटी की टीम को रिपोर्ट्स भेजी है, वह इसकी जांच कर रही है। उसी आधार पर मैं कुछ बता पाउंगा।
सवाल: संचालक और प्रबंधक को आरोपी बनाएंगे ?
जवाब: हमने कार्डियोलॉजिस्ट सहित अन्य पर एफआइआर दर्ज की है, जांच में जो दोषी मिलेगा उन पर कार्रवाई की जाएगी।

कलेक्टर और सीएमएचओ ने नहीं दिए जवाब
कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर और सीएमएचओ डॉ. मुकेश जैन ने सवालों के कोई जवाब नहीं दिए। सीएमएचओ मीडिया को देखकर भाग खड़े हुए। वहीं, कलेक्टर का कहना था कि उन्होंने आयोग के समक्ष दस्तावेज प्रस्तुत कर दिए हैं। टीम की रिपोर्ट के बाद ही कुछ बता पाएंगे।