
PM Awas Yojana
Mp news: राधाकृष्ण वार्ड में रहने वाले पद्माकर चौधरी का परिवार आज भी 100 साल पुराने मकान में रहने को मजबूर है। मकान पूरी तरह जर्जर हो गया है। दीवारे कभी गिर सकती है। छत को पन्नियों से बांधकर रखा है। इस स्थिति से आपको इसलिए अवगत कराया जा रहा है क्योंकि आज भी एमपी के पांढुर्ना शहर में आबादी वाली भूमि पर रहने वाले परिवारों को अपनी ही जगह की मालकियत नहीं मिल सकी है।
अपने परदादा के भी दादा के जमाने से पुश्तैनी मकानों में रहने वाले इन परिवारों के पास न तो जमीन की रजिस्ट्री है और न हीं प्लॉट खरीदने का कोई दस्तावेज है। जिससे इस जमीन को वे अपना साबित कर सकें। इसी वजह से आबादी में रहने वाले लगभग एक सैकड़ा परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है और वे जर्जर मकानों में ही अपना जीवन बिताने को मजबूर है।
सरकार ने पीएम आवास योजना के माध्यम से मकान निर्माण का सपना तो दिखाया लेकिन आबादी में रहने वाले अनेक परिवारों को आज तक मालकियत का हक नहीं दिया। ग्रामीण क्षेत्र की आबादी पर रहने वाले परिवारों को हाल ही में स्वामित्व योजना का लाभ मिला है ऐसी योजना शहर में कब आए यह अब सवाल यह उठ रहा है।
पेशे से खेती करने वाले पद्माकर चौधरी ने बताया कि पीएम आवास योजना के पोर्टल में भरने के लिए रजिस्ट्री या प्लॉट के दस्तावेंज मांग रहे है। हमारे पास दोनों ही नहीं है। मकान बनाना चाह रहे तो 50 हजार रुपए मकान गिराने और नया बनाने के लिए लगभग 8 लाख रुपए तक खर्च आ रहा है। फिलहाल इस जर्जर मकान में रहने को ही मजबूर है।
Published on:
31 Mar 2025 11:29 am

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