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जिला अस्पताल के मरीजों को झांसा देकर लाने पर हृदेश, मेट्रो और श्रीवास्तव नर्सिंग होम के लाइसेंस निरस्त

कलेक्टर पार्थ जैसवाल के निर्देश पर सीएमएचओ डॉ. आरपी गुप्ता ने हृदेश, मेट्रो और श्रीवास्तव नर्सिंग होम का लाइसेंस निरस्त कर दिया है। यह कार्रवाई जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से की गई है और इसके तहत इन तीनों नर्सिंग होम्स को मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने का दोषी पाया गया है।

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कलेक्टर के निर्देश पर जांच करते सीएमएचओ और एसडीएम

छतरपुर. जिला अस्पताल से मरीजों को निजी नर्सिंग होम में सर्जरी के लिए ले जाकर मोटी रकम वसूलने और सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों की मिलीभगत से चल रहे इस घोटाले पर प्रशासन ने कड़ा एक्शन लिया है। कलेक्टर पार्थ जैसवाल के निर्देश पर सीएमएचओ डॉ. आरपी गुप्ता ने हृदेश, मेट्रो और श्रीवास्तव नर्सिंग होम का लाइसेंस निरस्त कर दिया है। यह कार्रवाई जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से की गई है और इसके तहत इन तीनों नर्सिंग होम्स को मरीजों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने का दोषी पाया गया है।

लंबे समय से चल रहा था यह गोरखधंधा


संयुक्त टीम द्वारा की गई जांच में यह सामने आया कि जिला अस्पताल के डॉक्टरों की मिलीभगत से लंबे समय से निजी नर्सिंग होम्स में मरीजों को रैफर करने का खेल चल रहा था। सरकारी डॉक्टरों द्वारा मरीजों को बिना किसी मेडिकल जरूरत के इन नर्सिंग होम्स में भेजा जा रहा था, जहां उनसे भारी रकम वसूली जा रही थी। सीएमएचओ डॉ. आरपी गुप्ता ने बताया कि यह घोटाला उजागर होने के बाद उन्होंने त्वरित कार्रवाई की और संबंधित नर्सिंग होम्स का लाइसेंस निरस्त कर दिया।

हृदेश नर्सिंग होम में सबसे ज्यादा घोटाला


हृदेश नर्सिंग होम के मामले में विशेष जांच की गई, जिसमें डॉ. राजेंद्र धमनिया को जिम्मेदार पाया गया। इस नर्सिंग होम में इलाज करने वाले डॉ. धमनिया के पास स्वयं का लाइसेंस नहीं था और यह अस्पताल दूसरे डॉक्टर के नाम से पंजीकृत था। जांच में यह भी पाया गया कि डॉ. धमनिया ने पप्पू अहिरवार का ऑपरेशन किया था, जबकि सिविल सेवा नियमों के तहत वे इस नर्सिंग होम में इलाज नहीं कर सकते थे। इसके अतिरिक्त, अस्पताल में रेजिडेंट चिकित्सक डॉ. शुभांगी जैन, विजिटिंग डॉक्टर डॉ. सुदीप जैन, डॉ. सतीश कुमार चौबे सहित अन्य डॉक्टर भी उपस्थित नहीं पाए गए। इस कारण नर्सिंग होम का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया।

श्रीवास्तव नर्सिंग होम की अनियमितताएं में आई सामने


श्रीवास्तव नर्सिंग होम की जांच में भी कई खामियां पाई गईं। शाम सात बजे तक नर्सिंग होम में कोई डॉक्टर उपस्थित नहीं था, और मरीजों की देखभाल के लिए कोई चिकित्सक नहीं था। इसके साथ ही, नर्सिंग होम में जरूरी फायर सेफ्टी उपकरण भी नहीं पाए गए। इस गंभीर लापरवाही के कारण श्रीवास्तव नर्सिंग होम का लाइसेंस भी निरस्त कर दिया गया है।

मेट्रो नर्सिंग होम में अवैध एक्सरे मशीन चलती पाई गई


मेट्रो नर्सिंग होम में अवैध तरीके से एक्सरे मशीन चलाए जाने का मामला भी सामने आया। यहां रेजिडेंट चिकित्सक शालू वर्मा और विजिटिंग डॉक्टरों का अनुपस्थित होना भी पाया गया। इस नर्सिंग होम में भर्ती मरीजों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोई डॉक्टर उपस्थित नहीं था। इसके चलते मेट्रो नर्सिंग होम का लाइसेंस भी निरस्त कर दिया गया।

डॉ. धमनिया के खिलाफ सिविल सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन की भी कार्रवाई


सीएमएचओ डॉ. आरपी गुप्ता ने बताया कि इन नर्सिंग होम्स में मिली लापरवाही और अनियमितताओं के बाद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की। इसके अलावा, डॉ. आरके धमनिया के खिलाफ सिविल सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।

नर्सिंग होम्स पर प्रशासन की निगरानी बढ़ी


इस कार्रवाई के बाद जिला प्रशासन ने सभी नर्सिंग होम्स की निगरानी बढ़ा दी है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने का आश्वासन दिया है। इस तरह के कदमों से यह उम्मीद जताई जा रही है कि जिले में स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता में सुधार होगा और मरीजों को सुरक्षित उपचार मिलेगा। कलेक्टर पार्थ जैसवाल और सीएमएचओ डॉ. आरपी गुप्ता के नेतृत्व में की गई यह बड़ी कार्रवाई स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अब जिला अस्पताल से मरीजों को नर्सिंग होम में अवैध तरीके से भेजने की घटनाएं रुकने की उम्मीद है और प्रशासन की ओर से यह कड़ा संदेश दिया गया है कि अब कोई भी नर्सिंग होम नियमों से बाहर काम नहीं कर सकेगा।