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विश्व में मेंथा ऑयल में भारत की हिस्सेदारी 33 फीसदी, मध्यप्रदेश-बिहार में 15 फीसदी उत्पादन

मेंथा पिछले 50 सालों से भारत में उगाया जा रहा है। पिछले कुछ सालों से भारत मेंथा और इसके उत्पादों का मुख्य उत्पादनकर्ता तथा निर्यातकर्ता के रूप में विश्वपटल पर उभरा है।

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mentha oil plant

पिपरमेंट के पौधे से मिंट निकालने की प्रक्रिया करते किसान



छतरपुर. आज के समय में लोग स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक हो गए हैं। खासतौर से कोरोना महामारी के बाद हर्बल और आयुर्वेदिक उत्पादों की ओर लोगों का रुझान बढ़ा है। अब लोग प्राकृतिक इलाज और खानपान को प्राथमिकता दे रहे हैं। इस बदलाव के साथ-साथ खेती और बाजार का रुख भी बदल गया है। बिहार और मध्यप्रदेश जैसे राज्य अब हर्बल फसलों की खेती में भी काफी बढ़ोतरी कर रहे हैं। इनमें मेंथा, जिसे पिपरमिंट भी कहा जाता है, प्रमुख है। इसका उपयोग दवाई, तेल, ब्यूटी प्रोडक्ट्स, टूथपेस्ट, कैंडी आदि बनाने में किया जाता है। आजकल इसकी भारी मांग है और भारतीय किसानों के लिए यह एक लाभकारी फसल बन गई है।

चीन को पीछे छोडकर भारत बना नंबर 1

वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद(सीएसआईआर) के मुताबिक विश्व में सर्वप्रथम इसका उत्पादन ब्राजील और चाइना में हुआ था। इसके बडे उत्पादक देश भारत, अमेरिका, ब्राजील, चाइना तथा थाईलैण्ड है। इसके साथ-साथ वियतनाम में भी मेंथा का उत्पादन किया जाता है। मेंथा पिछले 50 सालों से भारत में उगाया जा रहा है। पिछले कुछ सालों से भारत मेंथा और इसके उत्पादों का मुख्य उत्पादनकर्ता तथा निर्यातकर्ता के रूप में विश्वपटल पर उभरा है। भारत विश्व निर्यात का लगभग 33 प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है, जो विश्व में अपनी सबसे बड़े निर्यातक देश के रूप अपनी स्थिति सुनिश्चित किए हुए है। विश्व में चाइना कुल 22 प्रतिशत निर्यात हिस्सेदारी के साथ भारत का निकटतम प्रतिद्वंद्वी है। इसके बाद जर्मनी 22 प्रतिशत तथा जापान 9 प्रतिशत निर्यात हिस्सेदारी के साथ विश्व पटल में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका स्थापित किए हुए है।


ये है देश में उत्पादन की स्थिति


वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद(सीएसआईआर) के मुताबिक भारत लगभग 40000 टन आवश्यक तेल, मेंथॉल क्रिस्टल और संबद्ध उत्पादों का निर्यात करने वाला एक प्रमुख देश है। भारत में मेंथा की खेती लगभग 300000 हेक्टेयर में होती है। मिंट की खेती उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और बिहार के सिंधु-गंगा के मैदानों के बड़े क्षेत्रों में की जाती है। इस फसल का 75 प्रतिशत उत्तर प्रदेश में, 15 प्रतिशत मध्य प्रदेश और बिहार में, 5 प्रतिशत उत्तराखंड में और शेष 5 प्रतिशत पंजाब और हरियाणा में उगाया जाता है।

मेंथा निर्यात से भारत को प्राप्त विदेशी मुद्रा

वर्ष मिलियन डालर
2020-2021 875.25

2021-2022 1035.90
2022-2023 928.17

2023-2024 1243.36
स्रोत- ट्रेडर्स कॉमर्स जीओवी

मेंथा का महत्व और बढ़ती मांग

मेंथा, जिसे पिपरमिंट के नाम से भी जाना जाता है, एक यूरोपीय पौधा है। लेकिन अब यह भारत और दुनिया के कई हिस्सों में प्रमुख रूप से उगाया जाता है। भारत में इसका उत्पादन और निर्यात बढऩे से भारत अब दुनिया के सबसे बड़े मेंथा ऑयल निर्यातक देशों में शामिल हो गया है। पहले भारत मेंथा का आयात करता था, लेकिन अब वह इसका सबसे बड़ा निर्यातक बन चुका है। उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में इसकी खेती प्रमुख रूप से की जाती है।


मध्यप्रदेश के इन जिलों में उत्पादन


भारत के मेंथा उत्पादन में मध्यप्रदेश व बिहार का योगदान 15 प्रतिशत है, जो इस राज्य के लिए एक गर्व की बात है। यहां की जलवायु और मिट्टी मेंथा की खेती के लिए बेहद उपयुक्त हैं, और इसका उत्पादन उच्च गुणवत्ता का होता है। मध्यप्रदेश के मंदसौर, नीमच, रतलाम , शाजापुर,छतरपुर जिलों में प्रमुख रूप से मेंथा की खेती होती है। इन जिलों में किसानों ने इस फसल को अपना प्रमुख आय स्रोत बना लिया है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है।

इनका कहना है

बुंदेलखंड की जलवायु, मिट्टी और पानी मेंथा की खेती के अनुकूल है। इस वजह से किसानों को इस नकद फसल में रुझान बढ़ा है। जिससे वे न केवल आत्मनिर्भर हो रहे बल्कि देश के निर्यात में योगदान दे रहे हैं।
डॉ. कमलेश अहिरवार, कृषि वैज्ञानिक