
Meeting of All India Andhra Bank Gold Appraisal Employees Association
वेलूर।चेन्नई, कोयम्बत्तूर एवं चित्तूर जोन की ओर से अखिल भारतीय आंध्रा बैंक के गोल्ड मूल्यांक कर्मचारी संगठन की वार्षिक बैठक रविवार को वेलूर के अन्नासालै स्थित येलगिरि सभा भवन में आयोजित की गई।
संगठन के अध्यक्ष राघवा चारी आरजू की अध्यक्षता में हुई इस बैठक की शुरुआत मुख्य अतिथि चेयरमैन कोन्डल राव ने की। अध्यक्ष राघवा ने सदस्यों के हित में शुरू की गई योजनाओं की चर्चा पदाधिकारियों के साथ की और गत वर्ष के आय-व्यय का ब्योरा पेश किया।
बैठक में उपाध्यक्ष राजेंद्र आचारी, संगठन सलाहकार नागराज, कार्यकरणी सदस्य कुमार आदि उपस्थित थे।
हर परिस्थिति में समभाव रखना अत्यावश्यक
टी.नगर में बर्किट रोड स्थित माम्बलम जैन स्थानक में विराजित जयधुरंधर मुनि ने कहा भगवान महावीर को अपने जीवनकाल में अनेक उपसर्गों का सामना करना पड़ा। वे इन उपसर्गों से तनिक भी विचलित नहीं होकर धैर्यपूर्वक उनका सामना किया। वे जानते थे कि ये उपसर्ग उनके द्वारा किए गए कर्मों का फल है इसलिए उन्होंने उनसे बचने का कभी प्रयास भी नहीं किया। विपदाओं के माध्यम से ही कर्मों से किनारा किया जा सकता है। महापुरुषों ने कहा है कि हर परिस्थिति में समभाव रखना अत्यावश्यक है।
साधारणतया सुख की घडिय़ों में जीव फूला नहीं समाता। उसकी धारणा बन जाती है कि जीवन में प्राप्त सुख उसी के द्वारा उपार्जित हैं। इसके विपरीत कष्टों के लिए दूसरों को दोषी ठहराने का प्रयास करता है। उन्होंने दुख व सुख के लिए हवा में लहराते हुए ध्वज का उदाहरण देकर बताया कि हवा में लहराता हुआ ध्वज कभी-कभी अपने स्तम्भ से लिपट जाता है और कुछ समय बाद हवा के माध्यम से वह फिर लहराने लगता है।
ध्वज का स्तम्भ से लिपट जाना और फिर से लहराना कर्म क्षय के समान है। अपने कर्मों का बोध व्यक्ति को कभी भी अवश्य होता है मगर पश्चाताप से कर्ममुक्त होना असंभव है। उनको भोगना ही पड़ता है। मुनि जयकलश ने गीतिका पेश की। संचालन मंत्री महेंद्र गादिया ने किया। संघ के उपाध्यक्ष डा. उत्तमचंद गोठी ने बताया कि मंगलवार व बुधवार को माम्बलम जैन स्थानक में ही मुनि के प्रवचन का समय सवेरे ९.३० से १०.३० बजे तक रहेगा।
Published on:
25 Mar 2019 12:03 am
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