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परकोटा की दीवार पर हजारों जख्म, अतिक्रमणकारियों ने सेंध लगाकर किया कमजोर

- साढ़े 7 किमी तक फैली है दीवार

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Thousands of wounds on the wall of Parkota, the encroachers weakened it by making a dent

Thousands of wounds on the wall of Parkota, the encroachers weakened it by making a dent

बुरहानपुर. शहर की सुरक्षा के लिए 300 साल पहले बनाई गई परकोटे की दीवारें अब खुद सुरक्षित नहीं है। अतिक्रमणकारियों ने मजबूत दीवारों पर सेंध लगाकर कमजोर कर दिया। किसी ने खिडक़ी, दरवाजे निकाल लिए तो कोई निजी उपयोग कर रहा है।निगम ने भी दीवारों का संरक्षण करने के बजाए व्यवसायिक उपयोग के लिए गेट की जगहों पर दुकानें बनाकर किराए पर दे दी। परकोटे की दीवारों की अनदेखी के चलते गिरकर नष्ट हो रही है।
साढ़े 7 किलो मीटर तक फैली यह परकोटे की दीवार में आवागमन के लिए कुल 9 गेट बनाए गए थे। अब 7 से 8 गेट ही शेष है, लेकिन यह भी जर्जर अवस्था में पहुंच गए। जीर्णोद्धार कार्य के नाम पर निगम ने शनवारा, राजपुरा गेट का काम ही कराया।जबकि जगह, जगह पर दीवार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो रही है।परकोट की दीवार का आधे से ज्यादा हिस्सा अतिक्रमणों की भेंट चढ़ा हुआ है। लोग निजी उपयोग कर दीवारों पर बाथरुम, शौचालय बनाकर पाइप डालने के लिए गड्ढें कर कमजोर कर रहे है।
किसी दिन बड़े हादसे का डर
लोहार मंडी गेट का ऊपरी हिस्सा कुछ दिनों पूर्व ही गिरने की घटना हुई थी, लेकिन इस घटना को निगम एवं प्रशासन ने गंभीरता से नही लिया। बारिश के समय दीवार पर झाडिय़ां उगने के साथ आसपास के हिस्सों में जलभराव होने से परकोटे की दीवारों की नींव कमजोर हो गई है, ऐसे में किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।अब तक हुए हादसो में गनीमत रही कि इससे किसी की जान नहीं गई।जबकि परकोटे से सट कर शहर में 20 हजार से ज्यादा मकान हैं जो अतिक्रमण कर बनाए गए हैं। मिट्टी धंसने से परकोटे की कमजोर पड़ी नींव भी नजर आने लगी है। लेकिन इसे प्रशासन भी गंभीरता से नहीं ले रहा।
यह है परकोटे का इतिहास
जिला पुरातत्व समिति सदस्य मोहम्मद नौशाद ने बताया कि 1737 ईस्वी में शहर की सुरक्षा के लिए तत्कालीन शासक निजाम मीर कमरुउद्दीन ने साढ़े 7 किमी लंबा परकोटा बनवाया था।व्यापार-व्यवसाय और दक्षिण जाने का यही प्रमुख मार्ग था। इसकी सुरक्षा और आने-जाने के लिए 9 दरवाजे और चार खिडक़ी बनाई गई थी। सुरक्षा के लिए परकोटे पर कई जगह सेना और तोप लगी रहती थी।