दो भाइयों के बीच जमीन विवाद का मामला 1945 में कोर्ट में लगने के बाद 70 साल बाद इसका निराकरण हुआ। शनिवार को आयोजित लोक अदालत में इसका निपटारा हुआ। जहां जवानी से बुढ़ापे तक के इंतजार के बाद जमीन के हिस्से के बदले नकदी रुपए लेकर याचिकाकर्ता ने राहत ली।
बंभाड़ा की 5 एकड़ जमीन के बंटवारे को लेकर स्वर्गीय लखमीचंद जैन ने अपने भाई प्रेमचंद जैन के विरुद्ध खंडवा जिला न्यायालय में 1945 में केस लगाया था। जिसका फैसला 1965 में कोर्ट ने सशर्त सुनाया कि इसमें प्रेमचंद की भाभी धोंडू बाई का भी हिस्सा रहेगा। इनके मरणोपरांत इनके हिस्से की जमीन भाइयों में जाएगी। बाद में लखमीचंद जैन की भी मृत्यु हो गई। 2006 में धोंडू बाई के गुजर जाने के बाद लखमीचंद जैन के बेटे शिखरचंद जैन ने धोंडू ौाई के हिस्से की जमीन का कब्जा वापस लेने के लिए केस 2008 में लगाया। लेकिन केस में एक नया मोड़ आ गया। धोंडूबाई ने यह जमीन सोहनलाल को बेच दी। इनसे पूछा तो बताया उन्होंने डिगंबर मनोहर को बेच दी थी। कोर्ट में केस चलने के बाद लोक अदालत में डिगंबर मनोहर ने शिखरचंद जैन को लगभग 11 लाख रुपए देकर न्यायालय ने समझौता कराया।
जिला विधिक अधिकारी रॉबीन दयाल ने बताया कि बैंक के ऋण बकाया राशि और विद्युत बकाया के एक हजार से ज्यादा मामलों में लोक अदालत में समझौते कर राशि वसूली गई। प्री-इटिगेशन के 775 मामलों में समझौता कराकर 46 लाख 88 हजार 141 रुपए वसूल कर प्रकरणों का निराकरण हुआ। विद्युत कंपनी ने 16 बैंच लगाकर बकाया बीलों के ब्याज में 40 से 100 प्रतिशत तक की छूट देकर प्रकरणों का निराकरण किया। लोक अदालत में बैंक ऑफि इंडिया, स्टेट बैंक, नर्मदा-झाबुआ ग्रामीण विकास बैंक सहित अन्य बैंकों ने बैंच लगाकर मामलों में निराकरण किए। वहीं नगर निगम में भी लोक अदालत का आयोजन हुआ। इसमें करीब 504 प्रकरणों का निराकरण कर 21.86 लाख रुपए वसूले है। निगमायुक्त सुरेश रेवाल ने बताया कि संपत्तिकर अधिभार, जल उपभोक्ता प्रभार, सरचार्ज के साथ छूट देकर प्रकरणों का निपटान किया गया। 16 8 8 प्रकरणो में 2 करोड़ 18 लाख 53 हजार 37 रुपए करदाताओं से राजस्व की वसूली की जाना प्रस्तावित थी।