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हिण्डोली के किले को मरम्मत की दरकार

हिण्डोली कस्बे में स्थित पहाड़ी पर बना गढ़ पैलेस रखरखाव के अभाव में कभी भी जमींदोज होने की संभावना बनी रहती है।

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हिण्डोली के किले को मरम्मत की दरकार

हिण्डोली के किले को मरम्मत की दरकार

हिण्डोली. हिण्डोली कस्बे में स्थित पहाड़ी पर बना गढ़ पैलेस रखरखाव के अभाव में कभी भी जमींदोज होने की संभावना बनी रहती है। यहां पर किले की दीवारें दरकने लगी है तो कई जगह का प्लास्टर उखड़
गया है।
जानकारी के अनुसार कस्बे के त्रिवेणी धाम के ऊपर स्थित पहाड़ी पर बड़े भूभाग पर किला बना हुआ है। जिसका एक छोर राम सागर झील की ओर नजर आता है। यहां पर राम सागर झील के ऊपरी व त्रिवेणी चौक के पूर्व की ओर स्थित पहाड़ी पर बना किला बदहाली पर आंसू बहा रहा है। जो वर्तमान में जमींदोज की स्थिति में है। किले में चढऩे के लिए रपट व खरंजा बना हुआ है। मुख्य रास्ते पर गंदगी के ढेर पड़े रहने से यहां पर जाने के लिए नाक पर हाथ धरकर जाना पड़ता है। किले का मुख्य दरवाजा भी जर्जर है। ऊपर फाटक के अंदर का दरवाजा भी कभी गिरने की संभावना रहती है। यहां पर किले में दरीखाना, जागीरदार के आवास, मंदिर आदि के रहने के स्थान बने हुए थे, लेकिन 50 वर्ष से किले के रखरखाव नहीं होने से बेहाल में हो गया। जिससे कभी भी जमींदोज होने की संभावना रहती है। यहां पर गत वर्ष मनरेगा से साफ सफाई की व बिखरे पत्थरों को समेटकर चारदीवारी लगाई गई।

पांच दशक से नहीं हुई सफाई
गढ़पति शंभू सिंह हाड़ा का कहना है कि हिण्डोली का किला ऐतिहासिक हैं। जिसमें पांच दशक पूर्व उनके परिवार किले में रहता , लेकिन किला ऊंचे स्थान पर होने व पानी नीचे आबादी से लाने पर काफी परेशानी होती थी। साथ में किले का रखरखाव नहीं होने से वह भी नीचे आकर बस्ती में रहने लगे। किले की दुर्दशा हो रही है। यहां पर पांच दशक से किले की मरम्मत तक नहीं हो पाई है। ऐसे में कभी भी जमींदोज होने की संभावना रहती है। हाडा का कहना है कि प्रशासन को चाहिए कि किले की मरम्मत हो, ताकि किले की सुंदरता व इतिहास कायम रहे।