Baby Massage Benefits In Hindi: आयुर्वेद के अनुसार नवजात अभ्यंग यानि बच्चे की मालिश उसके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बहुत जरूरी है। अभ्यंग से बच्चे की मांसपेशियां मजबूत होती, शरीर में ब्लड सर्कुलेशन सुचारू रहता और मौसमी बीमारियां दूर रहती है। मालिश से बच्चों की थकावट दूर होती है और उन्हें अच्छी नींद आती है। इससे मां और बच्चे का संबंध और भी मजबूत होता है।
नवजात अभ्यंग के तेल और घी का प्रयोग किया जाता है। बच्चे के सिर की मालिश के लिए घी का और शरीर की मालिश के लिए तेल का उपयोग करना अच्छा रहता है। मालिश के घर में खाने के लिए उपयोग किए जाने वाले तेलों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा बच्चों की मालिश के लिए बनने विशेष आयुर्वेदिक तेलों का उपयोग भी किया जा सकता है। एक दिन के बच्चे से लेकर 3 साल तक के बच्चाें का अभ्यंग जरूर करना चाहिए। चाहे ताे आगे भी नियमित किया जा सकता है।
मालिश के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
– बच्चे की मालिश भूखे पेट ही करें। भरे पेट मालिश करने से बच्चे का आमदाेष हाे सकता है।
– मालिश के दौरान और बाद के एक घंटे तक बच्चे को ठंडी हवा से बचा कर रखें।
– मालिश में खुशबू युक्त तलों के उपयोग से बचें। खाने में खाए जाने वाले तेल जैसे-नारियल, जैतून, तिल के तेल से मालिश की जा सकती है। सरसाें के तेल से भी मालिश की जा सकती है। लेकिन यह कुछ जलन करें तो अन्य तेलों का उपयोग करें।
– सिर में हमेशा देसी घी की मालिश करें।
– बुखार, उल्टी, दस्त और बच्चे को तकलीफ होने पर मालिश न करें।