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कानून का ये हाल! कार्यस्थल पर महिला कर्मचारी हो रही यौन उत्पीड़न का शिकार, शिकायत के बाद भी विशाखा समिति निष्क्रिय

Patrika Mahila Surksha: महिलाओं को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से रोकथाम और उन्हें न्याय दिलाने के लिए बनी विशाखा समिति अधिकतर सरकारी विभागों में महज कागजी साबित हो रही है।

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कानून का ये हाल! कार्यस्थल पर महिला कर्मचारी हो रही यौन उत्पीड़न का शिकार, शिकायत के बाद भी विशाखा समिति निष्क्रिय

Patrika Mahila Surksha: महिलाओं को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से रोकथाम और उन्हें न्याय दिलाने के लिए बनी विशाखा समिति अधिकतर सरकारी विभागों में महज कागजी साबित हो रही है। जहां समितियां गठित भी हैं, वे निष्क्रिय बनी हुई हैं, जिससे पीड़ित महिलाओं को न्याय नहीं मिल पा रहा है।

शासन की विशाखा गाइडलाइंस के तहत प्रत्येक सरकारी और निजी संस्थान में कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक आंतरिक शिकायत समिति (विशाखा) का गठन अनिवार्य किया गया था। यह समिति कामकाजी महिलाओं के साथ होने वाली प्रताड़ना या यौन उत्पीड़न की शिकायतों की सुनवाई और समाधान के लिए जिमेदार होती है।

लेकिन वर्तमान में कई सरकारी विभागों में यह समितियां या तो गठित ही नहीं की गईं या फिर सक्रिय नहीं हैं। जिससे महिला कर्मचारियों के साथ होने वाली मनमानी को सुनने वाला कोई नहीं है। ऐसे मामले आने पर भी महिला कर्मचारियों को घुट-घुट कर काम करने मजबूर होना पड़ रहा है, लेकिन जिमेदार मौन है।

महिला कर्मियों को नहीं मिल रहा न्याय

विशाखा समिति का मुख्य उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा और शिकायतों का त्वरित समाधान करना है, लेकिन जब समिति ही निष्क्रिय हो, तो पीड़िताओं को न्याय कैसे मिलेगा? कई सरकारी विभागों में महिलाओं की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जाता, जिससे वे न्याय पाने के लिए पुलिस या अदालत का सहारा लेने को मजबूर हो जाती हैं।

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सिम्स मेडिकल कॉलेज: ‘विशाखा’ निष्क्रिय

सिम्स मेडिकल कॉलेज में कार्यरत महिला कर्मचारियों और छात्राओं के लिए बनी विशाखा समिति का हाल बेहाल है। पिछले महीने एक पीजी छात्रा ने अपने एचओडी पर छेड़छाड़ और प्रताड़ना का आरोप लगाया था, लेकिन समिति ने इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया। लिहाजा निराश होकर थक-हारकर पुलिस का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। यह मामला विशाखा समिति की निष्क्रियता और महिलाओं के लिए न्याय की लड़ाई की असलियत को उजागर करता है।

समिति को स्वत: संज्ञान लेने का नियम, लेकिन हो रही अनदेखी

विशाखा समिति को यह अधिकार होता है कि वह किसी भी शिकायत पर स्वत: संज्ञान ले और बिना किसी दबाव के उचित कार्रवाई करे। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अधिकतर समितियां निष्क्रिय पड़ी हैं और शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं हो रही।

इसलिए जरूरी है समिति की सक्रियता

महिलाओं के कार्यस्थल पर सुरक्षित वातावरण के लिए
यौन उत्पीड़न या प्रताड़ना के मामलों का त्वरित निपटारा करने के लिए
महिलाओं को न्याय दिलाने और उनके अधिकारों की रक्षा करने के लिए
कार्यस्थल पर लैंगिक समानता और समानजनक माहौल बनाए रखने के लिए

इन विभागों में ये है स्थिति…

पत्रिका की टीम ने 7 सरकारी विभागों में विशाखा समितियों को लेकर पड़ताल की। पता चला कि ज्यादातर विभागों में इसका गठन ही नहीं हुआ है। जहां समिति गठित है, वह निष्क्रिय है। कई जगह तो महिला कर्मचारियों को ही इसकी जानकारी नहीं है। कलेक्टोरेट में विशाखा समिति का गठित है, यहां की अध्यक्ष डिप्टी कलेक्टर रजनी भगत हैं। जिला पुलिस प्रशासन की ओर से समिति गठित की गई है, इसकी अध्यक्ष एएसपी गरिमा द्विवेदी हैं। सिस में गठित

समिति की अध्यक्ष डॉ. आरती पांडेय हैं। जबकि महिला एवं बाल विकास विभाग में पूर्व में समिति का गठन हुआ था, डीपीओ सुरेश सिंह नए सिरे से समिति गठित करने का दावा करते हैं। जबकि नगर निगम, समाज कल्याण, शिक्षा विभाग में समिति का गठन नहीं किया गया है।