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बुजुर्गों की सेहत का ख्याल, ठंड में अटैक से बचने सीख

- प्राथमिक उपचार के लिए हजारों लोगों को दे चुके प्रशिक्षण

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भोपाल

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Shakeel Khan

Nov 25, 2019

बुजुर्गों की सेहत का ख्याल, ठंड में अटैक से बचने सीख

बुजुर्गों की सेहत का ख्याल, ठंड में अटैक से बचने सीख

भोपाल। ठंड की दस्तक के साथ बुजुर्गों के स्वास्थ्य को लेकर खतरा बढ़ रहा है। इस दौरान हार्ट अटैक के ज्यादा मामले आते हैं। इससे लोगों अवेयर कराने के लिए एक अभियान चलाया जा रहा है। इसमें 108 आपातकालीन सेवा के सैकड़ों वॉलेन्टियर जुड़े हैं। अब तक ये कई लोगों प्रशिक्षण दे चुके हंै।

शहर में जहां भी एम्बुलेंस का स्टाफ है वहां लोगों को इस बारे में बताया जा रहा है। 108 आपातकॉलीन एम्बुलेंस सेवा से जुड़े तरूण ने बताया कि इसे एक मुहिम के रूप में शुरू किया गया है। समय-समय पर इस संबंध में अभियान चलाया जाता है।

इन्होंने बताया कि आज के समय में लोग अनियमित दिनचर्या, अस्वस्थ खान-पान और बढ़ते प्रदुषण के कारण कई तरह की बीमारियों का शिकार हो जाते हंै। कभी-कभी उन बीमारियों के लक्षण को हम पहचान नहीं पाते है और फिर हमें उसका गम्भीर परिणाम भी देखना पड़ता है। जिनमे मुख्य और गंभीर समस्या है हार्ट अटैक। जिसका समय पर इलाज ना हो तो मरीज का बचना मुश्किल हो जाता है। लेकिन शुरू है कि 108 आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा है।

एम्बुलेंस में सभी मूलभूत उपकरण

108 एम्बुलेंस का संचालन करने वाली कंपनी जिगित्सा हेल्थ केयर लिमिटेड के प्रोजेक्ट हेड जितेंद्र शर्मा ने बताया कि हार्ट अटैक के मरीजों के लिए एक प्री-हॉस्पिटल केयर यानी आपातकालीन अस्पताल है जो कि नि:शुल्क 108 एम्बुलेंस सेवा है। जीवनरक्षा हेतु इस आपातकालीन एम्बुलेंस में सभी मूलभूत उपकरण जैसे - ए ई डी मशीन, अम्बुबैग, ब्लड प्रेशर नापने हेतु उपकरण, एवं जीवन रक्षक ऑक्सीजन प्रदान करने की उपयुक्त व्यवस्था है। साथ ही आपातकालीन दवाईयां भी उपलब्ध है जिनका उपयोग प्रशिक्षित इमरजेंसी मेडिकल तकनीशियन विशेषज्ञ चिकित्सक के मार्गदर्शन में रहते हैं।

प्राथमिक उपचार के लिए जागरूक शिविर

जागरूकता शिविर भी आयोजित किए जाते है। जागरूकता अभियान में प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ द्वारा आपातकालीन प्राथमिक उपचार के बारे में भी विस्तार से बताया जाता है। इसके अंतर्गत प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ के द्वारा लोगो को बताया जाता है कि गंभीर मरीज के पास एम्बुलेंस ना पहुंचे तब तक आप उसे प्राथमिक उपचार कैसे दें। जरा सी सावधानी से जान बच सकती है।