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रूस और अमेरिका एक मंच पर आएंगे, भगवान राम के आदर्शों का करेंगे बखान

अक्टूबर में रवीन्द्र भवन में अंतरराष्ट्रीय रामायण मेला का आयोजन होगा। इसमें 7 देशों के कलाकार आएंगे और 24 शैलियों मेें रामलीला का मंचन होगा। 7 दिनों तक मुक्ताकाश मंच पर अलग-अलग प्रसंगों का मंचन होगा।

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अंतरराष्ट्रीय रामायण मेले में देश-विदेश की संस्कृति को जान सकेंगे दर्शक

भोपाल। संस्कृति विभाग रवीन्द्र भवन में अंतरराष्ट्रीय रामायण मेला का आयोजन करने जा रहा है। पहली बार एक साथ 7 देशों के कलाकार यहां आकर अपने देश की लोकशैली में रामकथा सुनाएंगे। इस बार कोई एक दल पूरी रामलीला का मंचन नहीं करेगा, बल्कि 7 दिनों तक मुक्ताकाश मंच पर अलग-अलग प्रसंगों में भगवान राम के जीवन और आदर्शों का बखान होगा। गौरतलब है कि 2007 में भी अंतरराष्ट्रीय रामलीला मेले का आयोजन हो चुका है। यह ग्वालियर, इंदौर और भोपाल में हुआ था। तब 6 देशों के कलाकार आए थे।

एक मंच पर नजर आएगी आठ देशों की संस्कृति
संस्कृति विभाग के संचालक अदिति त्रिपाठी के अनुसार 16 से 22 अक्टूबर तक रवीन्द्र भवन में अंतरराष्ट्रीय रामायण मेला प्रस्तावित है। ताइवान, वियतनाम, थाइलैंड, श्रीलंका, रूस, यूएसए और सिंगापुर के दलों ने आने पर सहमति दे दी है। इंटरनेशनल कल्चरल रिलेशन (आइसीआर) के अधिकारी इन देशों के कलाकारों के संपर्क में हैं। एक सप्ताह तक चलने वाले मेले में अन्य गतिविधियां भी होंगी। देश के अलग-अलग राज्यों से कलाकारों को भी आमंत्रित किया गया है। चूंकि कई प्रदेशों में राम के जीवन को अलग नजरिए से रखा गया है। वहां उनकी लोक संस्कृति के अनुसार अलग-अलग शैलियों में रामकथा का मंचन होता है। ये कलाकार भी एक मंच पर प्रस्तुति देते नजर आएंगे। कर्नाटक, ओडिशा, बंगाल, आंध्रप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, कश्मीर, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश के दल लोकशैली में प्रसंगों का मंचन करेंगे। साथ ही जनजातीय समुदाय भी प्रस्तुति के माध्यम से भगवान राम और जनजातीय समुदाय के जुड़ाव को मंच पर जीवंत करेंगे। कुल 24 दल अपनी शैलियों में प्रस्तुति देंगे।

कठपुतली शो होंगे, नृत्य-संगीत प्रस्तुतियां भी होंगी
त्रिपाठी ने बताया कि रवीन्द्र भवन परिसर में शिल्प-हाथकरघा कारीगरों को बुलाया गया है। वहीं लोकशिल्पी कांसे, चांदी, लोहे के बर्तन, दीए व अन्य सामान लेकर आएंगे। ब'चों के लिए कठपुतली शो होंगे तो मप्र की जनजातीय समुदाय के कलाकार मुक्ताकाश में लोकनृत्य और गायन प्रस्तुतियां देंगे। लोककथाओं पर आधारित खिलौनों के स्टॉल भी यहां लगाए जाएंगे। शाम के सत्र में भजन गायन प्रस्तुतियां भी होंगी। साथ ही फूड स्टॉल पर विभिन्न राज्यों के व्यंजन का लुत्फ भी ले सकेंगे।