
Aasra old age home: बचपन में ही मां का साया सिर से उठ गया। पिता ने दूसरी शादी कर ली। ऐसे में भाई और बहनों को पढ़ाया-लिखाया। उनकी शादियां कीं। आज भाई ईरान में है। बहन ऑस्टे्रलिया में रह रही है। इन दोनों की दुनिया रोशन करने में अपना घर बसाने के लिए समय ही नहीं मिला। अब 70 साल की उम्र में दर-दर की खाक छान रहे हैं। भाई-बहन ने अपने साथ रखने से इनकार कर दिया तो नागपुर से भोपाल आ गए। यहां शाहजहांनाबाद स्थित आसरा में सहारा मिला है। यह दुखभरी कहानी है एडवोकेट विजय कुमार फ्रांसीस की। जो कभी नागपुर हाईकोर्ट में नामी वकील रहे हैं। उन्हें बुढ़ापे की वजह से कई बीमारियों ने घेर लिया है। अब वे तन्हा जिंदगी जी रहे हैं।
आसरा वृद्धाश्रम के कुछ बुजुर्गों के बीच वे अपने पुराने दिनों की याद करते हुए जीवन जी रहे हैं। उनके चेहरे की झुर्रियों में जिंदगी की तमाम उथल-पुथल और तन्हाई की गहरी लकीरें साफ झलकती हैं। आंखों में अनजानी सी उदासी और खामोशी है, जो उनके जीवन के दर्द को बयां करती है। वे अपनी कहानी सुनाते-सुनाते भावुक हो गए।
कांपती आवाज में उन्होंने अपनी जिंदगी का जिक्र शुरू किया। बोले-सिर्फ चार साल का था जब मां ने परिवारिक कलहों से तंग आकर आत्महत्या कर ली। पिता ने कुछ समय बाद दूसरी शादी कर ली। दो बहन और दो छोटे भाइयों की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर आ गई। आर्थिक तंगी के बीच बॉम्बे विश्वविद्यालय से वकालत की पढ़ाई की। भाई-बहनों की परवरिश की। रुंधे गले से उन्होंने बताया "मैंने अपनी जिंदगी परिवार को समर्पित कर दी। एक दत्तक पुत्री को गोद लिया। गुजरात में उसकी शादी की। उसका भाई भोपाल में रहता है। दिसंबर में बेटी भोपाल आई थी,उससे मिलने आया था। उन दोनों में कुछ विवाद हुआ, फिर बेटी गुजरात लौट गई। और मुझे फरवरी में आसरा में लाकर छोड़ दिया गया। अब आसरा ही घर है। और यहां रह रहे बुजुर्ग दुख-दर्द के साथी।
आसरा वृद्धाश्रम से जुड़ी समीना ने बताया कि यहां विजय जैसे कई लोग हैं, जिनके अपने उन्हें यहां छोडकऱ चले गए हैं। कोई बेटा, कोई भाई, कोई परिजन। सब अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लिया हैं। लेकिन, यहां लोग एक-दूसरे के सहारा बनकर, अपने दर्द को बांटकर, हंसी-मजाक में जिंदगी जी रहे हैं। अपनों की बेरुखी का दंश झेल रहे बुजुर्गों की आंखों में अब भी उम्मीद की एक किरण है।
Published on:
20 Apr 2025 11:32 am
बड़ी खबरें
View Allभोपाल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
