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video: चांद मिशन में मप्र के सूपतों का भी हाथ, प्रदेश के युवाओं पर नाज

राजधानी के बेटों ने भी चंद्रयान 3 की सफलता में चार चांद लगा दिए

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चांद मिशन में मप्र के सूपतों का भी हाथ, प्रदेश के युवाओं पर नाज

चंद्रयान की लैंडिंग होते ही बोट क्लब पर भी नावों में तिरंगा लेकर लोगों ने जश्न मनाया

भोपाल. बीते दिनों चंद्रयान की लैंडिंग होते ही सब खुशी से झूम उठे थे। घरों से लेकर मंदिरों, चौक चौराहों तक इसका जश्न मनाया गया। हाथों में तिरंगा लेकर लोग खुशियां मनाते नजर आए। बोट क्लब पर भी नावों में तिरंगा लेकर लोगों ने जश्न मनाया। जगह-जगह आतिशबाजी की, मिठाई बांटी और दीप जलाए। इसके पहले शहर के मंदिरों में chandrayaan चंद्रयान 3 की सफलता के लिए दिन भर अनुष्ठान, मंत्र जाप का सिलसिला चलता रहा। वहीं राजधानी के बेटों ने भी चंद्रयान 3 की सफलता में चार चांद लगा दिए। उनका योगदान भी इस अभियान में रहा। आइए जानते हैं किन युवाओं का योगदान इसमें रहा
चंद्रयान 3 में भोपाल के बेटे का योगदान भी है
ई/7 अरेरा कॉलोनी भोपाल निवासी ब्रज मोहन भारद्वाज के वैज्ञानिक पुत्र नितिन भारद्वाज (इसरो) चंद्रयान 3 की टीम के सदस्य है । पीनया कमांड सेंटर बैंगलोर में अभी उपस्थित हैं। रीजनल साइंस सेंटर, भोपाल में क्यूरेटर डी प्रकल्प समन्वयक, साकेत सिंह कौरव ने चंद्रयान - 3 लैंडर के सॉफ्ट-लैंडिंग के लाइव कवरेज को लोगों को गहन विश्लेषण के साथ सरलता से बताया। उन्होंने नासा के मून ट्रेक वेबसाइट का इस्तेमाल कर बच्चों के साथ इंटरैक्टिव सत्र को संचालित किया।

महेंद्र मिशन के प्रोजेक्ट हेड
बालाघाट के लाल ने कमाल कर दिया है। कैंडा टोला के महेंद्र कुमार ठाकरे ने इस मिशन में प्रोजेक्ट हेड की भूमिका निभाई है। महेंद्र इसरो में वर्षों से वैज्ञानिक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनकी इस उपलब्धि से पूरा जिला गौरवान्वित महसूस कर रहा है। chandrayaan चन्द्रयान-3 का सफल प्रक्षेपण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसरो के द्वारा अपना दम दिखाने में मील का पत्थर साबित हुआ है। महेंद्र कुमार ठाकरे वर्तमान में इसरो में वैज्ञानिक के रूप में त्रिवेंद्रम में काम कर रहे हैं। उनकी शिक्षा शासकीय बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बिरसा में पूरी हुई है। इसके बाद उन्होंने आईआईटी दिल्ली में दाखिला लिया।

प्रियांशु ने की ट्रेजेक्टरी डिजाइन
चंद्रयान-3 के प्रक्षेपण के लिए बनाए गए लांच व्हीकल एलव्हीएम 3 के अनुसंधान में उमरिया जिले के युवा वैज्ञानिक प्रियांशु मिश्रा का किरदार भी अहम है। प्रियांशु के छोटे से कस्बे चंदिया के रहने वाले हैं। प्रियांशु जिस टीम में शामिल हैं उसने ही chandrayaan-3 चंद्रयान-3 स्पेसक्रॉफ्ट को लिफ्ट टाक्स से पृथ्वी और चंद्रमा की कक्षा में छोडऩे तक के तीनों चरण की ट्रेजेक्टरी डिजाइन की है। प्रियांशु ने भोपाल से स्कूलिंग की है।

ओम की मॉनिटरिंग सेंटर पर नजर
अंतरिक्ष के क्षेत्र में कीर्तिमान बनाने जा रहे भारत के चंद्रयान-3 मिशन का अहम हिस्सा सतना के वैज्ञानिक के हाथों में है। करसरा गांव के मूल निवासी ओम पाण्डेय मॉरीसस के इसरो मॉनिटरिंग सेंटर से इस पर नजर रखे हैं। इनकी टीम का जिम्मा अर्थबाउण्ड फेज में चंद्रयान की आर्बिट को रेज करना है। सामान्य भाषा में कहें तो इस चरण में चंद्रयान के परिक्रमा पथ को बढ़ाते हुए क्रमश: दूर जाना है। ओम जिस टीम का हिस्सा है उसकी जिम्मेदारी चंद्रयान के परिक्रमा पथ को बड़ा करते हुए उसकी निगरानी करना है। पत्रिका को ओम पाण्डेय ने बताया कि इस काम के लिए वे फरवरी माह में ही मॉरीसस में आ गए थे। तब से लगातार मिशन के काम में जुटे हुए हैं। यह काफी दुरुह और जिम्मेदारी से भरा काम है। यहां का एंटीना चंद्रमा के एक हिस्से को ही ट्रेक कर सकता है।

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