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3000 करोड़ के इ-टेंडर घोटाले में 7 कंपनियों सहित 5 विभागों के अधिकारियों के खिलाफ FIR

अज्ञात ब्यूरोक्रेट्स के साथ नेता पर लगाई षडयंत्र, आइटी एक्ट व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं एसइडीसी, टीसीएस व सॉफ्टवेयर कंपनी एंट्रस के अफसरों को भी बनाया आरोपी    

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भोपाल.प्रदेश में ३ हजार करोड़ के इ-टेंडर में छेड़छाड़ करने के मामले में बुधवार को मप्र राज्य आर्थिक अपराध प्रकोष्ट (इओडब्ल्यू) ने ५ विभागों के खिलाफ एफआइआर दर्ज की है। इनमें जल निगम, सडक़ विकास निगम, लोक निर्माण विभाग, जल संसाधन विभाग और लोक निर्माण विभाग के पीआईयू शामिल है।

इओडब्ल्यू ने इ-टेंडर गड़बड़ी में मप्र राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कारपोरेशन के अधिकारियों-कर्मचारी और अज्ञात आईएएस और राजनीतिज्ञों को आरोपी बनाया है। इसके साथ इ-टेंडर पोर्टल बनाने वाली बंगलुरु की एंट्रस, टीसीएस और इनकी सहयोगी कंपनी ऑस्मो आईटी सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के अधिकारी-कर्मचारी भी आरोपी बनाए गए हैं। जांच में पांचों विभाग के कुल ३ हजार करोड़ रुपए के ९ टेंडरों में गड़बड़ी करने का मामला उजागर हुआ है।

टेंडर में छेड़छाड़ कर हजारों करोड़ का ठेका लेने वाली कंपनियों के संचालकों को भी आरोपी बनाया गया है। इनमें भोपाल की मेसर्स रामकुमार नरवानी लिमिटेड, मेसर्स जीवीपीआर लिमिटेड हैदराबाद, मेसर्स मैक्स मेंटोना लिमिटेड, द ह्यूम पाइप लिमिटेड मुंबई, मेसर्स जेएमसी लिमिटेड बडौदा, सोरठिया बेलजी प्रालि कंपनी शामिल हैं।

अब पुराने टेंडर की भी होगी जांच
कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम नई दिल्ली की रिपोर्ट में बताया गया हैं कि किस फोन नंबर, इंटरनेट, कंप्यूटर-लेपटॉप व आइपी एड्रेस से टेंपरिंग की गई है। यह भी बताया गया कि कुछ टेंडर में टेंपरिंग करने के लिए ई-प्रोक्यूरमेंट की साइट को हैक भी किया गया है। सर्ट की रिपोर्ट के आधार पर इओडब्ल्यू ने २०१७-१८ के ९ टेंडरों को विवेचना में ले लिया हैं। इसके बाद पुराने टेंडरों की जांच भी की जाएगी।

यह मॉड्स ऑपरेंडी अपनाई-

टेंपरिंग करने के लिए अधिकारियों-कर्मचारियों के पासवर्ड व यूजरनेम का उपयोग किया गया। इ-टेंडरिंग प्रक्रिया शुरु हुई तब निजी कंपनियों ने अफसरों-कर्मचारियों के पासवर्ड-यूजरनेम का उपयोग कर डेमो टेंडर तैयार किया था।

टेंडर अपलोड करने व खोलने की प्रक्रिया सीखाने के बहाने पासवर्ड-यूजरनेम एक-दूसरे ने शेयर कर लिया। इसमें अफसरों की भी सहमति रही। इसके जरिए ही टेंडर सबमिट करने की आखिरी तारीख के बाद वाली रात अथवा टेंडर खुलने वाले दिन की रात को टेंपरिंग की गई। सभी ९ टेंडरों में रात के समय ही टेंपरिंग की गई हैं।

कुछ टेंडर में सरकारी दफ्तरों में लगे कंप्यूटर, फोन, मोबाइल, इंटरनेट का उपयोग किया गया तो कुछ में निजी कंपनियों के दफ्तरों का। घोटाले में शामिल एक टेंडर में २३ मार्च और दूसरे में २० अप्रैल २०१८ की रात को टेंपरिंग की गई हैं। इसी तरह अन्य टेंडरों में भी रात को ही हेराफेरी कर कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया हैं।


सबसे अधिक जल निगम व जल संसाधन के टेंडर में टेंपरिंग

मप्र जल निगम के १७६९ करोड़ रुपए के तीन टेंडर में टेंपरिंग की गई। जल संसाधन विभाग के ११३५ करोड़ के २ टेंडर में टेंपरिंग की गई। पीआइयू के १५ करोड़ के १ टेंडर, लोक निर्माण विभाग के १४ करोड़ के २ और सडक़ विकास निगम के ८ करोड़ के १ टेंडर में टेंपरिंग की गई हैं।

एसपी-डीएसपी सहित दस अफसरों की टीम करेगी विवेचना

अब इस प्रकरण की विवेचना के लिए इओडब्ल्यू एसपी अरुण कुमार मिश्रा, डीएसपी सहित १० अफसरों की टीम करेगी। मुख्य विवेचक निरीक्षक रीना शर्मा होगी।

यह धाराएं लगाई गई-

भारतीय दंड विधान की धारा १२० बी, ४२०, ४६८, ४७१, आइटी एक्ट-२००० की धारा ६६, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम २०१८ की धारा ७ व धारा १३ (२) के तहत कायमी की गई है। पांचों विभागों के तत्कालीन अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है।

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