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पात्र कर्मियों को 22 साल में भी पदोन्नति नहीं, 12वीं पास भृत्य को बना दिया बाबू, इस्पात क्रेडिट सोसाइटी में सामने आई बड़ी गड़बड़ी

इस्पात क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी मर्यादित सेक्टर-6( पंजीयन क्रमांक 1796) में बड़े पैमाने पर अनियमिता सामने आई है।

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भिलाई

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Dakshi Sahu

Jul 08, 2021

भिलाई. इस्पात क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी मर्यादित सेक्टर-6( पंजीयन क्रमांक 1796) में बड़े पैमाने पर अनियमिता सामने आई है। यहां मनमर्जी से कर्मियों की पदोन्नति और संविदा नियुक्ति की गई है। पात्र कर्मी 22 साल से पदोन्नति का बोट जोह रहे हैं और दूसरी तरफ न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता नहीं होने के बावजूद कई लोगों को प्रमोट कर दिया गया है। बोर्ड का कार्यकाल खत्म होने के बाद सहकारिता विस्तार अधिकारी अमित श्रीवास्तव को संस्था का प्राधिकृत अधिकारी नियुक्त किया गया था, लेकिन पूर्व संचालक मंडल के दबाव में आकर विभाग ने मात्र डेढ़ माह के भीतर ही अमित को हटाकर उनके स्थान पर सहकारी निरीक्षक खगेश देशमुख को संस्था का प्राधिकृत अधिकारी नियुक्त कर दिया।

चल रही जांच
संस्था के संचालक मंडल ऐच्छिक सेवानिवृत्ति प्राप्त प्रबंधक बलराम सिंह को संविदा नियुक्ति देने पर जोर दे रहा था जिसका अमित ने विरोध किया। इसके कारण ही अमित को हटा दिया गया। इतना ही नहीं संस्था से सेवानिवृत्ति एक और कर्मचारी संजय कुमार सिंह को संचालक मंडल ने नियम विरुद्ध पदोन्नति दे दी थी जिसकी शिकायत नागरिक सहकारी बैंक के अध्यक्ष हरीश चंद्र ने खुद की थी। इसकी जांच प्रक्रिया अभी भी जारी है।

पदोन्नति में कर्मियों से पक्षपात
यहां कर्मचारियों की पदोन्नति में भी पक्षपात किया गया। सहायक बाबूलाल टंडन और संध्या धोकने को 1999 से 22 साल में भी पदोन्नति नहीं मिली। इसी प्रकार बी वेंकट राव और शशि सिंह को उनके नियुक्ति दिनांक 2012 से आज तक पदोन्नति नहीं दी गई है। इधर उमाशंकर शर्मा तथा धर्मेंद्र सहारे को 1 जनवरी 2021 को अयोग्य होते हुए भी भृत्य से सहायक के पद पर पदोन्नत किया गया। जबकि नए सेवा नियम के अनुसार सहायक के पद के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता स्नातक है। बताया जाता है उक्त दोनों कर्मचारी हायर सेकेंडरी पास है।

दलाली नहीं गली तो अनर्गल आरोप लगा रहे हैं
बैंक के पूर्व अध्यक्ष सुरेश चंद्र का कहना है कि कुछ लोगों की दलाली नहीं गली तो अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। नियुक्ति व पदोन्नति सब कुछ नियमानुसार और प्रावधान के तहत ही हुआ है। जहां तक अमित को हटाने की बात है तो वे संस्था विरोधी काम करने वालों को मदद कर रहे थे। 1963 अपने स्थापना काल से लेकर पहली बार पिछले पांच वर्षों में सोसाइटी का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा। आज सोसाइटी का 24 करोड़ रुपए फिक्स डिपॉजिट है। 5.47 करोड़ रुपए एनपीए की वसूली की गई। जो इस तरह का आरोप लगा रहा है वो खुद अपना नगारिक बैंक नहीं संभाल पा रहा है। 22 करोड़ का घाटा आज 99 लाख में पहुंच गया है। बंधक जमीन की बिक्री में दलाली करते हैं। एटीएम लगाने में हेरा-फेरी की है। अगर गड़बड़ी है तो वे कानून का दरवाजा क्यों नहीं खटखटाते। चुनाव है इसलिए बयानबाजी कर रहे हैं।

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