
कर्मियों के लिए नहीं, अपने ही संगठन में वर्चस्व दिखाने लड़ रहे इंटक नेता
भिलाई . इंटक और हिंदुस्तान स्टील एंप्लाइज यूनियन सीटू नेताओं के बीच जुबानी जंग थम नहीं रहा है। दोनों की श्रमिक संगठन के नेता भिलाई इस्पात के कर्मचारियों की सुविधाओं व भत्तों में बढ़ोतरी हुई है उसका श्रेय ले रहे हैं और कटौती हुई है उसका एक-दूसरे पर दोषारोपण करे रहे हैं। इंटक के ऐसे ही अरोप पर सीटू ने एक बार फिर पलटवार करते हुए जवाब दिया है। सीटू ने कहा है कि कर्मचारियों के बीच अपनी घटती साख एवं पिछड़ी हुई स्थिति को देखकर इंटक नेता बौखला गए हैं। मान्यता चुनाव की निकटता को देखते हुए स्थानीय इंटक पदाधिकारी समूह अपने केंद्रीय नेतृत्व एवं भिलाई इस्पात संयंत्र के कर्मचारियों को गुमराह करने के लिए तरह-तरह के प्रपंच रच रहे हैं। उनका यह दिखावटी जोशोखरोश कर्मियों के हित के लिए नहीं, संगठन के भीतर अपने वर्चस्व दिखाने की लड़ाई है।
कार्यकारी अध्यक्ष पूरण वर्मा ने कहा है कि 40 वर्षों तक मान्यता में रहने वाली श्रम संगठन इंटक अपनी उपलब्धियों को नहीं गिना पा रही है। एनजेसीएस कमेटी द्वारा लिए गए निर्णय से प्राप्त लाभ को अपने खाते में डाल कर वाहवाही लूटना चाह रही है। कार अलाउंस, मोबाइल सुविधा आदि एनजेसीएस की संयुक्त समिति द्वारा आंदोलन कर प्राप्त किया हुआ सुविधा है ,जो कि सीटू के कार्यकाल में प्राप्त की गई है। नैतिकता के स्तर पर सीटू ने कभी यह दावा नहीं किया कि इसमें केवल सीटू का ही प्रयास था। इसे बौद्धिक एवं मानसिक दिवालियापन ही कहा जा सकता है , जहां एनजेसीएस से प्राप्त सुविधाओं पर भी वर्तमान स्थानीय इंटक महासचिव अपने नाम से वाहवाही लूटना चाह रहे हैं।
पहले अपने गिरेबान में झांककर देखें
अभी कुछ समय पूर्व ही हुए मेडिकल अनफिट प्रकरण मे इंटुक पदाधिकारियों के धांधली का ऑडियो एवं वीडियो टेप मल्टीमीडिया एवं समाचार पत्रों में विरोधी यूनियन ने नहीं अपितु उनके अपने यूनियन के पदाधिकारियों ने ही सार्वजनिक की थी। उनके 40 वर्षों के मान्यता काल में भी साधारण अवकाश स्वीकृत कराने से लेकर, सीपीएफ के स्थाई एवं अस्थाई ऋण, संयंत्र के कर्मियों के बच्चों का शिक्षा, संयंत्र के कर्मियों का मकान आवंटन, एवं प्रबंधन से गले मिलकर चलने की नीतियां सदैव कर्मियों के बीच चर्चा का विषय रही हैं। गत 4 वर्षों से अनैतिक गतिविधियों में रोक इंटक की कार्यशैली पर घोर चोट है, जिसे इंटक पदाधिकारी बर्दास्त नहीं कर पा रहे हैं। जगह-जगह आर्थिक अनियमितताओं में फंसे हुए लोग आज दूसरों की ईमानदारी पर बेचैन होकर अनैतिक आरोप प्रत्यारोप कर रहे हैं।
अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहे हंै इंटक नेता
वर्मा ने कहा है कि सीटू का मानना है कि संयंत्र के स्थानीय इकाई इंटक गत दो चुनावों में हार जाने के बावजूद उनके विरोधियों के लिए भी उनका नेतृत्व सदैव सम्मानीय रहा। वर्तमान में इंटक नेतृत्व अघोषित रूप से अपने ही उच्च पदाधिकारियों को अपमानित एवं हाशिए में डालकर अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा को पूरा करने की लड़ाई लड़ रहे हैं। वर्तमान में उनका कर्मचारियों के हित से उनका कोई लेना-देना नहीं है , जिसका साक्षात प्रमाण यह है कि गत 4 वर्षों में श्रमिकों के हित में किए जाने वाले किसी भी आंदोलनों में इनके नेतृत्व का नाम मात्र का भी योगदान नहीं रहा।
Published on:
09 Jul 2018 12:44 am

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