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1970 के दशक से पहले आबाद था, अब वीरान है जटवाड़ा रेलवे स्टेशन

बस्सी @ पत्रिका. जयपुर- दिल्ली एवं जयपुर – आगर रेलवे ट्रेक पर बस्सी के सीमावर्ती जटवाड़ा रेलवे स्टेशन का 1970 के दशक से पहले काफी महत्व था, लेकिन आज यह रेलवे स्टेशन वीरान नजर अ रहा है। दिल्ली, यूपी व आगरा सहित कई बड़े शहरों से मालगाडि़यों में आना वाले माल की रैक जटवाड़ा रेलवे […]

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बस्सी @ पत्रिका. जयपुर- दिल्ली एवं जयपुर – आगर रेलवे ट्रेक पर बस्सी के सीमावर्ती जटवाड़ा रेलवे स्टेशन का 1970 के दशक से पहले काफी महत्व था, लेकिन आज यह रेलवे स्टेशन वीरान नजर अ रहा है। दिल्ली, यूपी व आगरा सहित कई बड़े शहरों से मालगाडि़यों में आना वाले माल की रैक जटवाड़ा रेलवे स्टेशन पर ही लगती थी।

यही कारण है कि अंग्रेजों ने रेलवे स्टेशन के समीप ही पुलिस चौकी भी स्थापित की थी। लेकिन रेलवे की उदासीनता एवं जयपुर व दौसा रेलवे स्टेशन डवलप होने के कारण धीरे- धीरे जटवाड़ा रेलवे स्टेशन का महत्व कम होता गया, आज दिन हाल यह है कि यहां पर मालगाडि़यों का ठहराव दूर सवारी गाडि़यां भी गिनी चुनी ही ठहरती है।

जब यहां रैक लगती थी, तो लोगों को भी मिलता था रोजगार….

किसी भी रेलवे स्टेशन पर मालगाडि़यों का ठहराव होता है और वहां पर बाहर से आने वाले माल की रैक लगती है, तो उस रेलवे स्टेशन का महत्व रेलवे की निगाह में आर्थिक दृष्टी से महत्व बढ़ बढ़ जाता है। यही िस्थतिजटवाड़ा रेलवे स्टेशन की थी, यहां भी मालगाडि़यों की रैक लगने के कारण आसपास के लोगों को माल ढुलाई की एवज में बड़े पैमाने पर मजदूरी मिलती थी। उस जमाने में यहां के लोगों को रोजगार के लिए दूसरे शहरों में जाने की जरूरत नहीं होती थी। जटवाड़ा रेलवे स्टेशन के समीप दुकान चलाने वाले मनोहर लाल शर्मा बताते हैं कि उनको उनके पिता कन्हैयालाल शर्मा बताते थे कि जब रेलवे स्टेशन पर रैक लगती थी तो यहां इतना काम आता था कि मजदूर ही कम पड़ जाते थे। जब से रैक लगना बंद हुआ तब से लोगों को जयपुर या दूसरे प्रदेशों में काम तलाशने जाना पड़ता है।

सुरक्षा के लिए अंग्रेजों ने खोली थी पुलिस चौकी…

अंग्रेजों के जमाने में जयपुर से दौसा के बीच में न कोई पुलिस थाना था और ना कोई पुलिस चाैकी थी। उस समय चोर – डाकुओं का भय अधिक था। जटवाड़ा रेलवे स्टेशन भी आबाद था। यहीं से रेलवे की रैक लगने के बाद उतरने वाले माल को दौसा, लवाण, बस्सी, तूंगा आदि के व्यापारी माल को लेकर जाते थे। जब लूट खंसोट का डर अधिक था। यही कारण था कि अंग्रेजों ने उस वक्त जटवाड़ा रेलवे स्टेशन से सट कर जटवा़ड़ा पुलिस चौकी की स्थापना की थी जो दौसा कोतवाली पुलिस थाने के अधीन आती थी, लेकिन अब बस्सी पुलिस थाने के अधीन आने लग गई है।

फाटक बंद रहने से रास्ता हो गया अवरूद्ध….

जटवाड़ा रेलवे स्टेशन के समीप रहने वाले लोग बताते हैँ कि हाइवे पर जटवाड़ा चौराहे से आने वाले रास्ते पर स्टेशन के नजदीक रेलवे फाटक संचालित था, जिसको रेलवे बंद कर दिया और एक किलोमीटर दौसा की ओर रेलवे फाटक बना दिया, इससे इस रास्ते से आने वाले लोगों का आवागमन बंद हो गया।

खण्डहरपड़े है रेलवे के आवास…

रेलवे स्टेशन के स्टाफ के लिए रेलवे ने करीब आधा दर्जन से अधिक आवास बनाए थे, जो सार – सम्भाल के अभाव में आज खण्डहर हो गए हैं। आज यदि ऐसे आवास बनाए जाए तो करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी नहीं बन सकते हैं। रेलवे को अपनी इस सम्पत्ती की मरम्मत करानी चाहिए। (कासं )